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ब्याज सहायता योजना

सहमति ज्ञापन

यह सहमति ज्ञापन नई दिल्ली में वर्ष 2009 के माह---------------------की------------------------- तारीख को----------------------राष्ट्रीय आवास बैंक/आवास एवं नगर विकास निगम लिमिटेड, भारत पर्यावास केन्द्र परिसन, लोधी मार्ग, नई दिल्ली-110003 के बीच़----------------------------------------------(नाम एवं पदनाम) (जिसे इसके बाद यहां प्रथम पक्षकार कहा गया) के माध्यम से और मैसर्स----------------------------------------बैंक/आवास वित्त कंपनी/ऋणदाता------------------------------------------------------(नाम एवं पदनाम)
पता-----------------------------------------------------------------------------(जिसके बाद यहां ऋणदाता/द्वितीय पक्षकार कहा गया है) के माध्यम से निष्पादित किया जाता है ।

जबकि भारत सरकार के आवास एवं शहरी ग़रीबी उपशमन मंत्रालय ने शहरी क्षेत्रों में आर्थिक रूप से कमज़ोर/अल्प आय वर्गों की आवासीय ज़रूरतों के समाधान के लिए एक अतिरिक्त उपाय के रूप में शहरी ग़रीबों के आवासार्थ ब्याज सहायता योजना नामक एक ब्याज सहायता योजना तैयार की है । योजना में आर्थिक रूप से कमज़ोर/अल्प आय वर्गों को ब्याज सहायता के प्रावधान की परिकल्पना की गई है जिससे ऐसे लाभार्थी मकान खरीद/बना सकें ।

जबकि भारत सरकार के आवास एवं शहरी ग़रीबी उपशमन मंत्रालय ने राष्ट्रीय आवास बैंक/हडको को यह योजना क्रियान्वित करने के लिए एक नोडल अभिकरण के रूप में नामित किया है । ये नोडल अभिकरण विभिन्न हिताधिकारियों को ऋणदाताओं द्वारा संस्वीकृत आवास ऋणों के संबंध में विभिन्न बैंकों/आवास वित्त कंपनियों/ऋणदाताओं को त्रैमासिक आधार पर ब्याज सहायता जारी करेंगे ।

जबकि ऋणदाता/द्वितीय पक्षकार, अन्य बातों के साथ-साथ, वैयक्तिक हिताधिकारियों को आवास ऋण देने के व्यापार में और/अथवा आस्थगित भुगतान के आधार पर व्यक्तियों को मकान/फ्लैट प्रदान करने में है और अपने ग्राह्य उधारकर्ताओं/हिताधिकारियों को आवास एवं शहरी ग़रीबी उपशमन मंत्रालय की ब्याज सहायता योजना की प्रसुविधा प्रदान करने में रु चि  रखता है ।

अब, इसलिए दोनों पक्षकारों ने यहां उल्लिखित नियम एवं शर्तों को मान लिया है ।

क.    भारत सरकार के आवास एवं शहरी ग़रीबी उपशमन मंत्रालय ने अभी हाल ही में शहरी ग़रीबों के लिए ब्याज सहायता योजना के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं जो इस सहमति ज्ञापन का अभिन्न अंग हैं । योजना की व्यापक विशेषताएं ऋण के लिए शर्तें  और आर्थिक सहायता की प्रतिपूर्ति, हिताधिकारियों का चयन, योजना के अधीन विभिन्न अभिकरणों की भूमिका एवं उत्तरदायित्व तथा योजना की निगरानी इत्यादि शहरी ग़रीबों के लिए ब्याज सहायता के लिए दिशा-निर्देशों के अनुसार होंगी ।

ख.    प्रथम पक्षकार को भारत सरकार द्वारा जारी की गई आर्थिक सहायता में द्वितीय पक्षकार को ब्याज सहायता मंज़ूर करने के लिए भारत सरकार के आवास एवं शहरी ग़रीबी उपशमन मंत्रालय द्वारा नियुक्त प्रथम पक्षकार अर्थात् राष्ट्रीय आवास बैंक/आवास एवं नगर विकास निगम लि. (हडको) नोडल अभिकरण है ।

ग.    प्रथम पक्षकार की भूमिका एवं उत्तरदायित्व

  1. प्रथम पक्षकार शहरी ग़रीबों के आवासार्थ योजना के अनुसार और भारत सरकार के आवास एवं शहरी ग़रीबी उपशमन मंत्रालय द्वारा प्रदत्त निधियों में से द्वितीय पक्षकार को ब्याज सहायता के लिए उत्तरदायी होगा । 3 महीनों की किसी भी अवधि के दौरान आर्थिक रूप से कमज़ोर/अल्प आय वर्ग के हिताधिकारियों को द्वितीय पक्षकार द्वारा संवितरित कुल ऋण के बारे में जानकारी मिलने पर हडको/राष्ट्रीय आवास बैंक प्रत्येक तिमाही के अंत में सीधे उन्हीं को सहायता राशि जारी करेंगे । भारत सरकार के आवास एवं शहरी ग़रीबी उपशमन मंत्रालय को शहरी ग़रीबों के आवासार्थ सहायता योजना में संशोधन/आशोधन/समाप्त करने की पूण स्वतंत्रता होगी । तथापि, ग्राह्य सहायता राशि की उपलब्धता के आधार पर, ऋणदाता/द्वितीय पक्षकार द्वारा पहले से मंज़ूर किए गए और आंशिक रूप से संवितरित ऋणों के संबंध में राशि, योजना की समाप्ति/संशोधन की स्थिति में, बजटीय आबंटन में से उपलब्ध कराई जाएगी ।
  2. सहायता आवास निर्माण/अधिग्रहण के लिए ऋण की सम्पूर्ण अवधि में केवल 1.00 लाख रुपए की अधिकतम ऋण राशि के लिए स्वीकार्य आर्थिक रूप से कमज़ोर/अल्प आय वर्ग के लिए ऋण के मूलधन पर 5% वार्षिक होगी । सहायता का निवल वर्तमान मूल्य ऋणदाता को पहले और त्रैमासिक आधार पर दिया जाएगा । ऋणदाता को दिया गया सहायता का निवल वर्तमान मूल्य उधारकर्ता/हिताधिकारी के ऋण के मूलधन से काट लिया जाएगा, जिन्हें बाद में ऋण की सम्पूर्ण अवधि के लिए एक स्वीकृत लिखित दर पर द्वितीय पक्षकार को ब्याज देना पड़ेगा । इस सहायता का निवल वर्तमान मूल्य ऋण की अवधि के लिए और ऋण स्वीकृत किए जाने के समय पर प्रभार्य ब्याज के लिए (सरकार की प्रतिभूति दर के समतुल्य) 9 प्रतिशत वार्षिक की कल्पित लिखित दर के आधार पर निकाला जाएगा ।

घ.    द्वितीय पक्षकार की भूमिका एवं उत्तरदायित्व

  1. ऋणदाता/द्वितीय पक्षकार एतद्द्वारा शहरी ग़रीबों के आवासार्थ सहायता योजना  की सम्पूर्ण प्रसुविधा अपने उधारकर्ताओं/हिताधिकारियों तक पहुंचाने का वचन देता है ।
  2. ऋणदाता/द्वितीय पक्षकार एतद्द्वारा योजना के नियमों एवं शर्तों के अनुसार शहरी ग़रीबों के आवासार्थ योजना को क्रियान्वित करने का वचन देता है ।
  3. ऋणदाता/द्वितीय पक्षकार एतद्द्वारा यह वचन देता है कि वह शहरी ग़रीबों के आवासार्थ सहायता योजना को क्रियान्वित करने के लिए उधार देने में सर्वोत्तम व्यवहार का पालन करेगा और भारतीय रिज़र्व बैंक/राष्ट्रीय आवास बैंक (योजना के लिए विनिर्दिष्ट दिशा-निर्देशों के अतिरिक्त, सामान्य दिशा-निर्देशों, दोनों) के लिए विनियमों एवं दिशा-निर्देशों का पालन करेगा ।
  4. ऋणदाता/द्वितीय पक्षकार जोखिम निर्धारण में अपनी सम्यक तत्परता का पालन करेगा और उधारकर्ता की पुनर्भुगतान की क्षमता और ऋण की ग्राह्यता के निर्धारण सहित, तत्पर मूल्यांकन एवं संस्वीकृति संबंधी क्रियाविधियां अपनाएगा ।
  5. उधारकर्ता (आर्थिक रूप से कमज़ोर/अल्प आय वर्ग, इत्यादि) की आय की पुष्टि करने के लिए राज्य स्तर पर नोडल सरकारी अभिकरण द्वारा सभी आवेदन-पत्रों  की जांच/प्रमाणन/आगे बढ़ाना, इत्यादि उपयुक्त रूप से किया जाएगा ।
  6. ऋणदाता/द्वितीय पक्षकार योजना के अधीन आवास एवं शहरी ग़रीबी उपशमन मंत्रालय की ओर से भी तथा संचालन समिति द्वारा सभी वर्तमान दिशा-निर्देशों का और समय-समय पर उनमें किए गए आशोधनों/संशोधनों का भी पालन करेगा ।
  7. ऋणदाता/द्वितीय पक्षकार एक अर्धवार्षिक आधार पर हडको/राष्ट्रीय आवास बैंक को उपयोगिता/अंतिम उपयोग का प्रमाण-पत्र भेजेंगे ओर आवासीय इकाई के पूरे हो रहे निर्माण कार्य की वास्तविक प्रगति के संबंध में भी एक प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करेंगे । ऋणदाता भवन निर्माण कार्य प्रारम्भ होने से एक वर्ष की अवधि के भीतर आवासीय इकाई के पूरा होने पर उपयोगिता का एक समेकित प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करेगा । यदि ऋणदाता/द्वितीय पक्षकार उपयोगिता/अंतिम उपयोग का प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाने में विलम्ब करता है, तब वह आर्थिक सहायता की राशि प्रथम पक्षकार को लौटाएगा । इसके अतिरिक्त, आर्थिक सहायता की अप्रयुक्त कोई राशि द्वितीय पक्षकार द्वारा तत्काल प्रथम पक्षकार को संदेय हो जाएगी ।
  8. ऋणदाता/द्वितीय पक्षकार भवन के डिज़ाइन आधारिक सुविधाओं इत्यादि के लिए अनुमोदन सहित, योजना के अधीन वित्तपोषित आवासीय इकाइयों के निर्माण की और निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निगरानी करेगा और कार्यस्थल का दौरा करने इत्यादि के ज़रिए, निर्माण कार्य की विभिन्न अवस्थाओं तक उपगत व्यय का भी सत्यापन करेगा ।
  9. उधारकर्ता द्वारा ऋणदाता संस्थान को ऋण के पुनर्भुगतान की चूक की और ऋण के अनर्जक आस्ति बन जाने की स्थिति में ऋणदाता /द्वितीय पक्षकार संपत्ति के पुरोबंध सहित, समुचित समझे जाने वाले उपायों के ज़रिए देय राशि की वसूली की कार्यवाही प्रारम्भ करेगा । ऐसे सभी मामलों में, वसूली की राशि सर्वप्रथम आर्थिक सहायता (ऋण की शेष अवधि) के लिए प्रभारित की जाएगी और यह ऋणदाता/द्वितीय पक्षकार की ओर से नोडल अभिकरण को आगे सरकार द्वारा यथा विनिश्चित भुगतान/समायोजनार्थ दी जाएगी ।
  10. ऋणदाता/द्वितीय पक्षकार प्रत्येक ऋणी/उधारकर्ता/हिताधिकारी को एक विवरण उपलब्ध कराएगा, जो उसे आर्थिक सहायता के रूप में राशि समझाएगा कि किस प्रकार आर्थिक सहायता की राशि समायोजित की गई है और समान मासिक किस्त पर आर्थिक सहायता का क्या संघात हुआ है ।
  11. ऋणदाता/द्वितीय पक्षकार अन्य ऐसी सभी जानकारी/विवरण अथवा विशेष विवरण, जो समय-समय पर प्रथम पक्षकार के लिए अथवा आवास एवं शहरी ग़रीबी उपशमन मंत्रालय द्वारा अपेक्षित है, भी प्रदान करेगा ।
  12. ऋणदाता/द्वितीय पक्षकार ऋणी/उधारकर्ताओं/हिताधिकारियों को ब्याज की स्थिर/अस्थिर दरों पर ऋण लेने के परिणाम स्पष्ट रूप से समझाएगा ।

ङ     विवाद्य एवं अधिकार क्षेत्र

इन सभी हालातों में प्रथम पक्षकार और द्वितीय पक्षकार के बीच उत्पन्न होने वाले विवाद्यों एवं मतभेदों का यथासंभव समाधान बातचीत से किया जाएगा । तथापि, यदि कोई मतभेद/विवाद्य अभी तक बना रहता है, तो यह माध्यस्थम् एवं समझौता अधिनियम, 1996 के उपबंधों के अधीन राष्ट्रीय आवास बैंक/हडको के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक द्वारा नियुक्त एकमात्र माध्यस्थम् को भेजा जाएगा । एकमात्र माध्यस्थम् का निर्णय अंतिम एवं पक्षकारों के लिए बाध्यकारी होगा । माध्यस्थम् की कार्यवाहियां दिल्ली में की जाएंगी ।

ऊपर लिखी तारीख को दिल्ली में हस्ताक्षरित

राष्ट्रीय आवास बैंक के लिए एवं उनकी ओर से

आवास एवं नगर विकास निगम लिमिटेड के लिए
तथा उनकी ओर से                                           बैंक/आवास वित्त कंपनी/ऋणदाता
प्रथम पक्षकार                                                 द्वितीय पक्षकार

दिशा-निर्देश

शहरी ग़रीबों के आवासार्थ आर्थिक सहायता - संबंधित प्ररू प

क.    उपयोगिता प्रमाण-पत्र का प्ररूप
ख.    रिपोर्टिंग अनुलग्नक

शहरी ग़रीबों के आवासार्थ आर्थिक सहायता के अधीन निवल वर्तमान मूल्य के परिकलन के लिए सोदाहरण तालिकाएं

क.    15 वर्षों के लिए 8.5% की दर स े
ख.    20 वर्षों के लिए 8.5% की दर से

 

प्राथमिक ऋणदाता संस्थानों की सूची जिन्होंने आईएसएचयूपी के तहत रा.आ.बैंक के साथ समझौता ज्ञापन निष्पादित किया

आईएसएचयूपी योजना के लिए राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी

 
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