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विनियम

एनएचबी(एनडी)/एचएफसी(डीआरएस-आरईजी)/आईएनएस/2072/2000
 
25 जुलाई, 2000
 
 
 
मुख्य कार्यपालक - आवास वित्त कंपनियां
 
 
 
महोदय,
 
 
बीमा कारोबार में आवास वित्त कंपनियों के प्रवेश के संबंध में दिशा-निर्देश
 
 
 

1. राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा पंजीकृत कोई भी आवास वित्त कंपनी जिसकी निवल स्वाधिकृत निधि पिछले संपरीक्षित तुलन-पत्र के अनुसार 5 करोड़ रुपए से कम नहीं है,

को बिना किसी जोखिम भारिता के शुल्क के आधार पर बीमा कंपनियों के एजेंट के रूप में बीमा कारोबार करने की अनुमति दी जाएगी ।

 
 
 

2. राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा पंजीकृत सभी आवास वित्त कंपनियां जो निम्नलिखित पात्रता मानदंडों को पूरा करती हैं , को जोखिम सहभागिता के साथ बीमा कारोबार करने के लिए, कुछ सुरक्षा उपायों के साथ, संयुक्त उद्यम स्थापित करने की अनुमति दी जाएगी ।

ऐसे संयुक्त उद्यम में आवास वित्त कंपनियें का अधिकतम इक्विटी अंश बीमा कंपनी की चुकता पूंजी का सामान्यत: 50 प्रतिशत हो सकता है । चयनित आधार पर,

रा.आ.बैंक प्रवर्तक आवास वित्त कंपनी को आरम्भ में अधिक इक्विटी अभिदान, किन्तु निर्धारित अवधि में इक्विटी के विनिवेश होने तक, के लिए अनुमति दे सकता है ।

संयुक्त उद्यम में सहभागिता के लिए पात्रता मानदंड नवीनतम उपलब्ध संपरीक्षित तुलन-पत्र के अनुसार होंगे जो निम्नानुसार हैं :

 
(i) आवास वित्त कंपनी की निवल स्वाधिकृत निधि 500 करोड़ रुपए से कम नहीं होना चाहिए ।
 
(ii) आवास वित्त कंपनी की सीआरएआर 12 प्रतिशत से कम नहीं होना चाहिए ।
 
((iii) निवल अनुपयोज्य आस्तियों का स्तर कुल बकाया अग्रिमों के 5 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए ।
 
(iv) आवास वित्त कंपनी पिछले तीन वर्षों में लगातार लाभ अर्जित करती रही हो
 
(v) संबंधित आवास वित्त कंपनी की सहायक कंपनियों, यदि हो, का ट्रैक रिकार्ड संतोषजनक होना चाहिए ।
 
(vi) विनियमों का संतोषजनक अनुपालन तथा सार्वजनिक निक्षेपों, यदि हों, की सेवाई ।
 
 
3. राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम, 1987 के प्रावधान आवास वित्त कंपनी की निवल स्वाधिकृत निधियों की गणना करते समय ऐसे निवेशों पर लागू होंगे ।
 
 
 

4. यदि विदेशी भागीदार बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण/विदेशी निवेश प्रोन्नति बोर्ड के अनुमोदन से इक्विटी में अभिदान (26 प्रतिशत से अधिक नहीं) करता है तो एक से अधिक आवास वित्त कंपनी को बीमा संयुक्त उद्यम में भागीदारी के लिए अनुमति दी जा सकती है । इस प्रकार भागीदारी में बीमा जोखिम भी माना जाएगा, अत: वे ही आवास वित्त कंपनियां जो उपर्युक्त अनुच्छेद 2 में दिए मानदंडों को पूरा करती हैं, पात्र होंगी ।

 
 
 

5. किसी भी आवास वित्त कंपनी को यह कारोबार विभागीय तौर पर करने की अनुमति नहीं दी जाएगी । आवास वित्त या बैंकिंग के कारोबार में संलग्न आवास वित्त कंपनी के उसी ग्रुप में किसी सहायक या कंपनी को जोखिम सहभागिता आधार पर बीमा कंपनी में शामिल होने की आमतौर से अनुमति नहीं दी जाएगी ।

 
 
 

66. रा.आ. बैंक द्वारा पंजीकृत आवास वित्त कंपनियां जो उपर्युंक्त उल्लेखानुसार संयुक्त उद्यम में सहभागिता के लिए पात्र नहीं है, वे बीमा कंपनी में आवास वित्त कंपनी की

निवल स्वाधिकृत निधि की 10 प्रतिशत राशि या 50 करोड़ रुपए, जो भी कम हो, का निवेश कर सकती हैं । ऐसी सहभागिता को निवेश माना जाएगा और आवास वित्त

कंपनी की कोई आकस्मिक देयता नहीं होगी । इन आवास वित्त कंपनियों के लिए पात्रता मानदंड निम्नानुसार होंगे :

 

i) आवास वित्त कंपनी की सीआरएआर 12 प्रतिशत से कम नहीं होनी चाहिए ।

 

ii) अनुपयोज्य आस्तियों का स्तर कुल बकाया अग्रिमों के 5% से अधिक नहीं होना चाहिए ।

 

iii) आवास वित्त कंपनी पिछले तीन वर्षों से लगातार लाभ अर्जित कर रही हो ।

 
 
 

7. रा.आ.बैंक द्वारा पंजीकृत वे सभी आवास वित्त कंपनियां जो बतौर एजेंट या निवेशक या जोखिम सहभागिता आधार पर बीमा कारोबार में प्रवेश कर रही हैं, को रा.आ. बैंक से पूर्व

अनुमोदन प्राप्त करना होगा । रा.आ.बैंक सभी संगत कारणों को ध्यान में रखते हुए हरेक केस पर विचार करके आवास वित्त कंपनियों को अनुमति प्रदान करेगा । यह सुनिश्चित कर

ˆलिया जाए कि बीमा कारोबार में होने वाला जोखिम आवास वित्त कंपनी को हस्तांतरित न किया जाए तथा आवास वित्त कंपनी का कारोबार ऐसे किसी जोखिम से दूषित न हो जाए

जो बीमा कारोबार में हो सकता है ।

 
 
 
7. उपर्युक्त दिशा-निर्देश निम्नलिखित शर्तों के साथ लागू होगे :
 
 

(i) प्रवर्तक आवास वित्त कंपनी द्वारा बीमा कंपनी में इक्विटी धारण या बीमा कारोबार में किसी प्रकार से सहभागिता आईआरडीए/केन्द्रीय सरकार द्वारा

निर्धारित किए गए नियमों एवं विनियमों का अनुपालन करते हुए की जाएगी । इसके साथ ही आरआरडीए अधिनियम, 1999 द्वारा यथा संशोधित बीमा

अधिनियम की धारा 6एए की अनुपालना भी शामिल है जो चुकता पूंजी के 26 प्रतिशत से अधिक इक्विटी के एक निर्धारित अवधि में विनिवेश से संबंधित है ।

 
 

(ii) वित्त वर्ष 2000-2001 के दौरान प्राप्त आवेदनों के लिए, 1999-2000 के संपरीक्षित तुलन- पत्र क ाú तारीख के बाद नई निवेशित पूंजी का भी

लेखा लिया जाएगा । अद्यतन तारीख पर अ-संपरीक्षित और सत्यापित तुलन-पत्र की भी पात्रता मानदंडों के निर्धारण के लिए गणना की जाएगी

और उक्त तारीख क ा तुलन-पत्र रा.आ.बैंक को यथा शीघ्र प्रस्तुत किया जाए ।

 
 
((iii) आगामी वर्षों के लिए, पात्रता मानदंड के लिए गणना पिछले वर्ष के नवीनतम उपलब्ध संपरीक्षित तुलन-पत्र के अनुसार की जाएगी ।
 
 
88. कृपया इस परिपत्र की पावती दें ।
 
 
 
भवदीय,
 
 
 
 
(पी.के. चट्टोपाध्याय)
 
महाप्रबंधक
 
 
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