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विनियम

विनियमन
 

आवास वित्त कंपनियों में आस्ति देयता प्रबंध प्रणाली के लिए दिशा-निर्देश

 
 
सामान्यत: आस्ति देयता संबंधी रूपान्तरण की दृष्टि से, आवास वित्त कंपनियों के सामने ऋण एवं बाज़ार जोखिम बना रहता है । पिछले कुछेक वर्षों में भारतीय वित्त बाज़ार में उदारीकरण और विदेशी बाज़ारों के साथ स्वदेशी बाज़ारों के बढ़ते एकीकरण से, किसी आवास वित्त के परिचालन से जुड़े जोखिम जटिल और भारी हो गए हैं और उसके लिए रणनीतिपरक प्रबंधन की ज़रूरत है । आवास वित्त कंपनियां एक उचित रूप से अविनियमित वातावरण में परिचालन कर रही हैं और उनके लिए स्वयं अपनी ओर से एक गतिशील आधार पर, उस ब्याज की अधिकतम दर, जो वे जमाराशियों पर दे सकती हैं, के लिए उच्च सीमा के अध्यधीन, अग्रिमों एवं जमाराशियों पर ब्याज की दर अवधारित करना आवश्यक है । सरकारी एवं अन्य प्रतिभूतियों में आवास वित्त कंपनियों के निवेश पर ब्याज की दरें भी अब बाज़ार से संबंधित होती हैं । आस्ति एवं देनदारियों, दोनों से संबद्ध व्यापार के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा ने कीमत-लागत-अंतर, लाभप्रदता एवं दीर्घावधि अर्थक्षमता के बीच एक अच्छा संतुलन बनाए रखने के लिए आवास वित्त कंपनियों के प्रबंधन पर दबाव डाला है । ये दबाव ढांचागत और व्यापक उपायों की मांग करते हैं और मात्र तदर्थ कार्रवाई की नहीं । आवास वित्त कंपनियों के प्रबंधन को अपने व्यापारिक निर्णयों को कॉरपोरेट रणनीति से प्रेरित एक गतिशील और एकीकृत जोखिम प्रबंध प्रणाली एवं प्रक्रिया पर आधारित करना होगा । आवास वित्त कंपनियों के सामने उनके व्यापार के अनुक्रम में बहुत से जोखिम होते हैं, जैसे कि ऋण जोखिम, ब्याज दर जोखिम, साम्य (इक्विटी)/वस्तु मूल्य जोखिम, चलनिधि जोखिम एवं परिचालन जोखिम । अत: यह आवश्यक है कि आवास वित्त कंपनियां ऐसी प्रभावी जोखिम प्रबंध प्रणाली लागू करें जो ब्याज दर और चलनिधि जोखिम से संबंधित विषयों का समाधान करे ।
 

2. आवास वित्त कंपनियों को इन जोखिमों का समाधान जोखिम प्रबंधन को समुन्नत करके और आस्ति-देयता-प्रबंध का एक ऐसा अधिक व्यापक व्यवहार अपना कर एक ढांचागत ढंग से करने की आवश्यकता है जो अब से पहले किया जाता रहा है । अन्य प्रकार्यों में, आस्ति-देयता प्रबंध भी जोखिम के प्रबंध से संबंधित है और किसी आवास वित्त कंपनी के मूल्यांकन करने, उसको मॉनीटर करने और चलनिधि तथा ब्याज दर जोखिमों का प्रबंध करने के लिए एक व्यापक और गतिशील कार्यढांचा प्रदान करता है जिसे आवास वित्त कंपनी की व्यापारिक रणनीति के साथ निकट से जोड़ने की आवश्यकता है ।

 

 

1. यह नोट चलनिधि के प्रबंध और ब्याज दर जोखिमों के लिए प्रणालियों के संबंध में आवास वित्त कंपनियों हेतु व्यापक दिशा-निर्देश निर्धारित करता है, जो आस्ति-देयता प्रबंध प्रकार्य का एक भागरूप होता है । आस्ति-देयता प्रबंध प्रकार्य का प्रारम्भ में ध्यान केन्द्र बाज़ार जोखिम प्रबंध का अनुशासन प्रवर्तित करना अर्थात् संबद्ध बाज़ार जोखिमों के आकलन के बाद व्यापार प्रबंधन होगा । एक उत्तम जोखिम प्रबंध प्रणाली का उद्देश्य आवास वित्त कंपनियों के प्रभावी प्रबंधन के लिए एक रणनीतिपरक साधन में विकसित होना चाहिए ।

2.आस्ति-देयता-प्रबंध प्रक्रिया तीन स्तंभों पर आधारित है :-

आस्ति-देयता-प्रबंध सूचना प्रणाली ।

प्रबंधन सूचना प्रणाली ।

सूचना उपलब्धता, यथातथ्यता, पर्याप्तता और औचित्य ।

ढांचा एवं उत्तरदायित्व ।

शीर्ष प्रबंध की संबद्धता का स्तर ।

आस्ति-देयता-प्रबंध प्रक्रिया ।

जोखिम पैरामीटर ।

जोखिम की पहचान ।

जोखिम का परिमाण ।

जोखिम का प्रबंधन ।

जोखिम संबंधी नीतियां एवं सहनशीलता का स्तर ।

 
 
आस्ति-देयता-प्रबंध सूचना प्रणाली

 

 
2.1 आस्ति-देयता-प्रबंध का समर्थन एक ऐसे प्रबंधकीय दर्शन से करना होगा जो स्पष्ट रूप से जोखिम संबंधी नीतियों एवं सहनशक्ति सीमाओं को विनिर्दिष्ट करता है । इस कार्यढांचे को आवश्यक सहायक सूचना प्रणाली सहित एक ठोस पद्धति विज्ञान पर खड़ा करने की ज़रूरत है क्योंकि सम्पूर्ण आस्ति-देयता-प्रबंध क्रिया का केन्द्रीय तत्व युक्ति सहित एक पर्याप्त एवं यथातथ्य सूचना की उपलब्धता है । इस प्रकार, सूचना आस्ति-देयता-प्रबंध प्रक्रिया की कुंजी है । जोखिमों का परिमाण जानने की विभिन्न विश्वव्यापी पद्धतियां प्रचलित हैं । ये साधारण अंतराल विवरण से लेकर अत्यन्त जटिल और आंकड़ा गहन जोखिम समायोजित लाभप्रदता मापन पद्धतियों तक फैले हैं । कुछेक बड़ी आवास वित्त कंपनियों में विद्यमान प्रणालियां उस ढंग से सूचना नहीं देती हैं जैसी कि आस्ति-देयता-प्रबंध के लिए अपेक्षित है । सामयिक ढंग से यथातथ्य आंकड़े एकत्रित करना आवास वित्त कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है, विशेषकर उन आवास वित्त कंपनियों के सामने जिनके पूर्ण मापमान में कमी है । तथापि, जोखिम प्रबंध और मॉनीटर करने के लिए आधार सूचना प्रणाली को अत्यावश्यक रूप से लागू करना होगा ।
 
 
5.2 आवास वित्त कंपनियों के पास पंचमेल संगठनात्मक ढांचे, पूंजी आधार, आस्ति आकार प्रबंध-पार्श्विका एवं भौगोलिक विस्तार होता है । उनमें से कुछ की बहुत सी शाखाएं होती हैं, अभिकर्ता/दलाल होते हैं जबकि कुछ के एठकिक कार्यालय होते हैं । शाखाओं के वर्तमान कार्यसंजाल (नेटवर्क) और आस्ति-देयता-प्रबंध के लिए अपेक्षित सूचना एकत्रित करने के लिए प्रणाली की (यथेष्ठ) सहायता की कमी, जो अवशिष्ट परिपक्वता और देनदारियों तथा आस्तियों की पुनर्मूल्यन पद्धति के आधार पर सूचना का विश्लेषण करती है, पर विचार करते हुए, आवश्यक सूचना प्राप्त करने में वर्तमान अवस्था में आवास वित्त कंपनियों के लिए समय लगेगा । निवेश सूची एवं निधि प्रबंध के संबंध में, प्रकार्यों की केन्द्रीयकृत प्रकृति की दृष्टि से, विश्वस्त सूचना एकत्रित करना अधिक सरल होगा । आंकड़ों एवं पूर्वानुमानों को तब समय पर परिष्कृत किया जा सकता है क्योंकि आवास वित्त कंपनी का प्रबंधन एक आस्ति-देयता-प्रबंध कार्यढांचे के भीतर व्यापार संचालित करने का अनुभव प्राप्त करता है । संगणनाकरण का विस्तार भी आंकड़ों को प्राप्त करने में आवास वित्त कंपनियों की सहायता करेगा ।
 

 

आस्ति-देयता-प्रबंध संगठन

6.1 क. जोखिम प्रबंधन प्रक्रिया के सफल क्रियान्वयन के लिए, मूलभूत परिचालनों को एकीकृत करने और जोखिम प्रबंधन के साथ रणनीतिपरक निर्णय लेने में आवास वित्त कंपनी के वरिष्ठ प्रबंधन की ओर से एक सुदृढ़ प्रतिबद्धता आवश्यक होगी । निदेशक मंडल का जोखिम प्रबंधन के लिए समग्र उत्तरदायित्व होना चाहिए और आवास वित्त कंपनी की जोखिम प्रबंध नीति विनिश्चित करनी चाहिए तथा चलनिधि, ब्याज दर विनिमय दर और साम्य (इक्विटी) मूल्य जोखिमों के लिए सीमा निश्चित करनी चाहिए ।

 

ख. मुख्य कार्यपालक अधिकारी सहित आवास वित्त कंपनी के वरिष्ठ प्रबंधकों की आस्ति-देयता-समिति आवास वित्त कंपनी के बजट के अनुसार (आस्ति और देनदारियों की ओर) आवास वित्त कंपनी की व्यापार रणनीति विनिश्चत करने के अतिरिक्त, निदेशक मंडल द्वारा निश्चित सीमा का पालन सुनिश्चित करने और विनिश्चित किए गए जोखिम प्रबंध उद्देश्यों के लिए उत्तरदायी होनी चाहिए ।

 

ग. परिचालन कर्मचारीवृंद को लेकर गठित आस्ति-देयता-प्रबंध सहायक ग्रुपों को आस्ति-देयता-समिति के जोखिम पार्श्विकाओं का विश्लेषण करने, मॉनीटर करने और रिपोर्ट करने के लिए उत्तरदायी होना चाहिए । कर्मचारियों को पूर्वानुमान (अनुरूपण) तैयार करने चाहिएं जिनमें तुलन-पत्र पर बाज़ार की स्थितियों में विभिन्न संभावित परिवर्तनों को दर्शाया जाए तथा आवास वित्त कंपनी की आंतरिक सीमा के पालन के लिए आवश्यक कार्रवाई की सिफारिश की जाए ।

 
 

6.2 आस्ति-देयता-समिति ब्याज दर और चलनिधि जोखिम के नीतिपरक प्रबंधन सहित जोखिम की दृष्टि से एकीकृत तुलन-पत्र प्रबंधन के लिए उत्तरदायी एक निर्णय लेने वाली इकाई है । प्रत्येक आवास वित्त कंपनी को अपनी आस्ति-देयता-समिति की भूमिका पर, उसकी शक्तियों और उत्तरदायित्वों पर और इसी प्रकार उसकी ओर से किए जाने वाले निर्णयों पर भी विनिश्चय करना होगा । आवास वित्त कंपनी की व्यापार एवं जोखिम प्रबंधन रणनीति को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसका परिचालन उसके निदेशक मंडल द्वारा निश्चित सीमा/पैरामीटर के भीतर होता है । उन व्यापारिक विषयों, जिन पर आस्ति-देयता-समिति विचार करेगी, उनमें अन्य बातों के साथ-साथ जमाराशियों एवं अग्रिमों का उत्पाद मूल्य, वांछित परिपक्वता पार्श्विका और आस्तियों एवं देनदारियों का वृद्धिशील मिश्ण समान सेवाओं/उत्पाद इत्यादि के लिए अन्य समकक्ष आवास वित्त कंपनियों की ओर से प्रदत्त प्रचलित ब्याज दरें शामिल हैं । आवास वित्त कंपनी के जोखिम स्तरों को मॉनीटर करने के अतिरिक्त, आस्ति-देयता-समिति को पूर्वतम बैठकों में लिए गए निर्णयों के क्रियान्वयन में प्रगति एवं परिणामों का पुनरीक्षण करना चाहिए । आस्ति-देयता-समिति आवास वित्त कंपनी के चालू ब्याज दर पर विचार भी सुस्पष्ट करेगी और इस पर भावी व्यापार रणनीति के लिए अपना विनिश्चयआधारित करेगी । उदाहरणार्थ, निधिकरण नीति के संबंध में, उसका उत्तरदायित्व स्रोत और देनदारियों के मिश्ण अथवा आस्तियों के विक्रय पर विनिश्चय करना होगा । इस दिशा में, उसे ब्याज दर संचलन के भावी निर्देश पर एक विचार विकसित करना होगा और स्थिर बनाम अस्थिर दर निधियो, थोक विक्रय बनाम खुदरा विक्रय निधियों, मुद्रा बाज़ार बनाम पूंजी बाज़ार निधियों, स्वदेशी बनाम विदेशी मुद्रा निधियों इत्यादि के बीच निधि मिश्णों पर विनिश्चय करना होगा । वैयक्तिक आवास वित्त कंपनियों को अपनी आस्ति देयता समिति की बैठक की बारम्बारता विनिश्चित करनी होगी ।

 
 
आस्ति-देयता-समिति का गठन
 

6.3 आस्ति-देयता-समिति का आकार (सदस्यों की संख्या) प्रत्येक संस्थान व्यापार मिश्ण एवं संगठनात्मक जटिलता के आकार पर निर्भर करेगी । शीर्ष प्रबंधन की प्रतिबद्धता और बाज़ार की गतिशीलता के प्रति सामयिक उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने के लिए, मुख्य कार्यपालक अधिकारी/अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक/अध्यक्ष अथवा कार्यपालक निदेशक को सिमति का अध्यक्ष होना चाहिए । निवेश, ऋण, संसाधन प्रबंधन अथवा नियोजन निधि प्रबंधन/राजकोष, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार एवं आर्थिक अनुसंधान विभागों के मुखिया समिति के सदस्यगण हो सकते हैं । इसके अतिरिक्त, प्रौद्योगिकी प्रभाग का अध्यक्ष भी प्रबंध सूचना प्रणाली तैयार करने और संबंधित कम्प्यूटरीकरण के लिए आमंत्रित किया जाना चाहिए । बड़ी आवास वित्त कंपनियों में उप-समितियां और सहायक ग्रुप भी हो सकते हैं ।

 
 
समिति के निदेशकगण
 
 
6.4 निदेशक मंडल की प्रबंधन समिति अथवा निदेशक मंडल द्वारा गठित कोई अन्य विनिर्दिष्ट समिति को आस्ति-देयता-समिति को अधिदर्शित करना चाहिए और उसके प्रकार्य की आवधिकता का पुनरीक्षण करना चाहिए ।
 
 

7आस्ति-देयता प्रबंध प्रक्रिया

- - चलनिधि जोखिम प्रबंधन

-- बाज़ार जोखिम प्रबंधन

- - निधिकरण एवं पूंजी नियोजन

- - लाभ नियोजन एवं वृद्धि प्रदर्शन

-- 'क्या यदि परिदृश्य' का पूर्वानुमान एवं विश्लेषण तथा आकस्मिक योजनाएं तैयार करना

 
 
इस नोट में अंतर्विष्ट दिशा-निर्देश मुख्यत: चलनिधि एवं ब्याज दर जोखिमों का समाधान करते हैं ।—
 
 
चलनिधि जोखिम प्रबंधन
 
8.1आवास वित्त कंपनियों के प्रभावी परिचालन के लिए चलनिधि को आंकने और उसके प्रबंध संबंधी आवश्यकताएं महत्वपूर्ण होती हैं । देय हो जाने पर किसी आवास वित्त कंपनी की देनदारियां पूरी करने की उसकी योग्यता आंकने से, चलनिधि प्रबंध एक प्रतिकूल परिस्थिति बनने की संभाव्यता को कम कर सकता है । चलनिधि की आवश्यकता वैयक्तिक संस्थान से बढ़कर होती है, क्योंकि किसी एक संस्थान में चलनिधि की कमी का प्रतिघात सम्पूर्ण प्रणाली पर हो सकता है । आवास वित्त कंपनी के प्रबंधन को न केवल एक अग्रगामी आधार पर किसी आवास वित्त कंपनी की चलनिधि की स्थिति को आंकना चाहिए अपितु यह भी जांच करनी चाहिए कि कैसे चलनिधि की अपेक्षाओं की विभिन्न कल्पनाओं में विकसित होने की संभावना है । अनुभव दर्शाते हैं कि आस्तियों को सामान्यतया चलनिधि होना माना जाता है, जैसे कि - सरकारी प्रतिभूतियां और अन्य मुद्रा बाज़ार की लिखतें भी उस समय चलनिधि बन जाती हैं जब बाज़ार एवं व्यापारीगण दिशात्मक नहीं होते हैं । अत: चलनिधि को परिपक्वता अथवा नकदी प्रवाह असंतुलनों के माध्यम से खोज-खबर रखनी होगी । निवल निधिकरण संबंधी अपेक्षाओं को आंकने और उनका प्रबंध करने के लिए एक परिपक्व सोपान और संचयी अधिशेष के परिकलन अथवा चयनित परिपक्वता की तारीखों पर निधियों के घाटे का प्रयोग एक मानक उपाय के रूप में अंगीकार किया जाता है । चलनिधि के विवरण का प्ररूप अनुलग्नक-I में दिया गया है ।
 
 

8.2 परिशिष्ट-I में यथा वर्णित, परिपक्वता पार्श्विका का उपयोग विभिन्न समयावधियों में आवास वित्त कंपनियों के भावी नकदी प्रवाहों को आंकने में किया जा सकता है । समयावधियों को निम्न प्रकार से वितरित किया जा सकता है :-

i. दिन से 30/31 दिनों (एक महीने) तक

ii. 1 महीने से अधिक और 2 महीनों तक

iii.2 महीनों से अधिक और 3 महीनों तक

iv. 3 महीनों से अधिक और 6 महीनों तक

v. 6 महीनों से अधिक और 1 वर्ष तक

vi. 1 वर्ष से अधिक और 3 वर्ष तक

vii. 3 वर्ष से अधिक और 5 वर्ष तक

viii. 5 वर्ष से अधिक और 7 वर्ष तक

ix. 7 वर्ष से अधिक और 10 वर्ष तक

x. 10 वर्ष से अधिक

 
 
8.3 सार्वजनिक जमाराशियों को रखने वाली आवास वित्त कंपनियों के लिए अपनी जमाराशियों का एक विहित प्रतिशत, राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम, 1987 की धारा 29बी के अधीन अर्थसुलभ आस्तियों की अपेक्षाओं के अनुसार, अनुमोदित सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करना अनिवार्य है । इस प्रकार से विभिन्न आवास वित्त कंपनियां अपनी निवेश सूची में ऐसी प्रतिभूतियां रख रही हेंगी जो स्थूल रूप से (कानून की बाध्यता में) आवश्यक प्रतिभूतियों और अन्य अनावश्यक प्रतिभूतियों के रूप में वर्गीकरणीय हो सकती हैं । जमाराशियां रखने वाली आवास वित्त कंपनियों को उनके लिए यथा उपयुक्त किसी समयावधि में आवश्यक प्रतिभूतियों को रखने की स्वतंत्रता दी जा सकती है । सूचीबद्ध अनावश्यक प्रतिभूतियां "1 दिन से 30/31 दिन (एक महीने)", "एक महीने से और 2 महीनों तक" तथा "दो महीनों से और 3 महीनों तक" की किसी भी समयावधि में, आवास वित्त कंपनी की ओर से प्रस्तावित विफलीकरण की अवधि के अनुसार रखा जा सकता है । सूचीबद्ध अनावश्यक प्रतिभूतियां (अर्थात् साम्य (इक्विटी) शेयर, परिपक्वता की किसी निश्चित अवधि के बिना प्रतिभूतियां) अवशिष्ट परिपक्वता के अनुसार, "10 वर्षों से अधिक" की समयावधि में रखी जा सकती हैं । आवश्यक प्रतिभूतियां और सूचीबद्ध प्रतिभूतियां आस्ति-देयता प्रबंध प्रणाली के उद्देश्य से बाज़ार के लिए चिन्हित की जा सकती हैं । असूचीबद्ध प्रतिभूतियों का मूल्यांकन विवेकसम्मत मानदंडों के अनुसार किया जाए ।—
 
 

8.4 विकल्पत: आवास वित्त कंपनियां "व्यापार पुस्तक" (ट्रेडिंग बुक) की संकल्पना का पालन भी कर सकती हैं, जो निम्न प्रकार से है :-

1. गठन एवं आकार स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाता है ।

2. व्यापार सूची (ट्रेडिंग पोर्टफोलियो) की अधिकतम परिपक्वता/अवधि प्रतिबंधित होती है ।

3. धारिता की अवधि 90 दिनों से अधिक नहीं होती है ।

4. अधिकतम हानि की सीमा विहित होती है ।

5. उत्पाद क्रम से विफलीकरण की अवधियां (अर्थात् गौण बाज़ार में चलनिधि के आधार पर स्थिति को समाप्त करने के लिए दिया गया समय) विहित होता है ।

 
जो आवास वित्त कंपनियां प्रतिभूतियें की व्यापार-बही (ट्रेडिंग बुक) रखती हैं, जो उपर्युक्त मानकों का अनुपालन करती हैं, वे व्यापारी प्रतिभूतियें को "1 दिन से 30/31 दिनें (एक महीने), " एक महीने से अधिक 2 महीनों तक" की समयावधि में विफलीकरण अवधि के आधार पर दर्शाएं । आवास वित्त कंपनी का निदेशक मंडल/आस्ति-देयता समिति को व्यापार-बही (ट्रेडिंग बुक) के खंड, गठन, अधिक परिपक्वता/अवधि, धारिता/विफलीकरण, निर्दिष्ट हानि सीमा इत्यादि का अनुमोदन करना चाहिए । शेष बचा निवेश भी यथा अल्पावधि एवं दीर्घावधि निवेश वर्गीकृत किया जाना चाहिए, जैसा विवेकसम्मत मानदंडों में अपेक्षित है ।
 
 
8.5 आस्ति-देयता प्रबंध के उद्देश्य से, निवेश सूची के व्यवहार पर, आवास वित्त कंपनी द्वारा अभिलिखित एवं उनके निदेशक मंडल/आस्ति-देयता समिति की ओर से अनुमोदित नीतिगत नोट की एक प्रति राष्ट्रीय आवास बैंक को अग्रेषित की जानी चाहिए ।
 
 
8.6 प्रत्येक समयावधि में, नकदी प्रवाहों और बाह्य प्रवाहों पर निर्भर करते हुए असंतुलन हो सकते हैं । जहां एक वर्ष तक के असंतुलन सुसंगत होंगे, क्योंकि ये चलनिधि संबंधी आसन्न समस्याओं का शीघ्र चेतावनी संकेत देते हैं, वहीं मुख्य रूप से ध्यान अल्पावधि असंतुलन अर्थात् 1-30/31 दिनों पर केन्द्रित किया जाना चाहिए । तथापि, आवास वित्त कंपनियों से निदेशक मंडल/प्रबंधन समिति के अनुमोदन के साथ आंतरिक विवेकसम्मत सीमा स्थापित करके सभी समयावधियों में अपने संचयी असंतुलन (कुल योग) को मॉनीटर करने की आशा की जाती है । सामान्यतया, 1-30/31 दिनों की अवधि में असंतुलन (नकारात्मक अंतराल) इस समयावधि में नकदी प्रवाहों के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए । यदि अपनी चालू आस्ति-देयता सूची एवं परिणामी ढांचागत असंतुलनों की दृष्टि से, आवास वित्त कंपनी को अधिक छूट के स्तर की आवश्यकता होती है, तब वह ऐसी उच्चतर सीमा के लिए आवश्यकता पर विनिर्दिष्ट कारण देते हुए अपने निदेशक मंडल/प्रबंधन समिति द्वारा संस्वीकृत उच्चतर सीमा के साथ परिचालित कर सकती है । छूट के उच्चतर स्तर की अनुमति देने का विवेक एक अस्थायी अवधि अर्थात् 30 सितम्बर, 2002 के लिए आशायित है ।
 
 
8.7 ढांचागत चलनिधि का विवरण (अनुलग्नक-1) की तैयारी नकदी प्रवाहों के प्रत्याशित समय के अनुसार, परिपक्वता सोपान में सभी अन्त: नकदी प्रवाहों एवं बाह्य प्रवाहों को रखकर की जाए । एक परिपक्व हो रही देयता एक नकदी प्रवाह होगी जबकि परिपक्व हो रही कोई आस्ति एक नकदी प्रवाह होगी । संभावित नकदी प्रवाहों/बाह्य प्रवाहों को अवधारित करते समय, आवास वित्त कंपनी को अपनी आस्ति-देयता पार्श्विका के अनुसार बहुत सी कल्पनाएं करनी पड़ती हैं । छूट का स्तर अवधारित करते समय, आवास वित्त कंपनी अपना आस्ति-देयता आधार, व्यापार की प्रकृति, भावी रणनीतियां, इत्यादि पर आधारित सभी सुसंगत कारकों को हिसाब में ले सकती हैं । राष्ट्रीय आवास बैंक यह सुनिश्चित करने में रुचि रखता है कि छूट के स्तर सभी आवश्यक कारकों को ध्यान में रखते हुए और उन्हें चलनिधि प्रबंधन में प्राप्त किए गए और अनुभवों से परिष्कृत करके आधारित किए जाते हैं ।
 
 
8.8 आवास वित्त कंपनियां 1 दिन से 6 महीने की एक सीधी समयावधि में, एक गतिशील आधार पर, अपनी अल्पावधि चलनिधि को मॉनीटर करके, इसके लिए वे नियोजन के उद्देश्यों से, व्यापार की संभावनाओं एवं अन्य प्रतिबद्धताओं के आधार पर अपनी अल्पावधि चलनिधि संबंधी पार्श्विकाओं का अनुमान कर सकती हैं । अल्पावधि गतिशील चलनिधि के लिए एक सांकेतिक प्ररूप (अनुलग्नक-II) संलग्न है ।
 
 
मुद्रा संबंधी जोखिम
 
9. अस्थिर विनिमय दर व्यवस्था अपनी चेतना में विदेशी आस्तियां अथवा देयता रखने वाले आवास वित्त कंपनी के तुलन-पत्रों की जोखिम पार्श्विका में नए आयाम जोड़कर एक घोषित अस्थिरता ले आई है । अविनियमन के बाद मुक्त अर्थव्यवस्थाओं में वर्धित पूंजी प्रवाहों ने लेनदेन की मात्रा में वृद्धि करने में अंशदान किया है । अस्थिरता सहित सीमा पार के भारी प्रवाह के साथ आवास वित्त कंपनी के तुलन-पत्रें को विनिमय दर संचलन के लिए सुभेद्य बना सकते हैं ।
 
 
ब्याज दर जोखिम
 
10.अधिकांश आस्तियों एवं देयता के मूल्यन में आवास वित्त कंपनियों को दिए गए परिचालन संबंधी लचीलेपन का निहितार्थ ब्याज दर की प्रतिरक्षा के लिए एक वित्तीय प्रणाली की ज़रूरत होता है । ब्याज दर जोखिम एक ऐसा जोखिम है जहां बाज़ार की ब्याज दरों में परिवर्तन किसी भी आवास वित्त कंपनी की वित्तीय स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है । ब्याज दरों में परिवर्तनें का तत्काल संघात आवास वित्त कंपनी के अर्जन (अर्थात् - प्रतिवेदित लाभ) पर उसकी निवल ब्याज आय में परिवर्तन से होता है । ब्याज दर परिवर्तन का एक दीर्घकालीन संघात आवास वित्त कंपनी की साम्य पूंजी (इक्विटी) अथवा निवल धन पर होता है, क्योंकि बाज़ार की ब्याज दरों में अन्तर के कारण आस्तियों, दायित्वों और तुलन-पत्र से बाहर की मदों का आर्थिक मूल्य प्रभावित हो जाता है । ब्याज दर जोखिम को जब इन दोनों परिप्रेक्ष्य में देखा जाता है, तब इसे क्रमश: अर्जन परिप्रेक्ष्य और आर्थिक मूल्य परिप्रेक्ष्य कहा जाता है । अर्जन परिप्रेक्ष्य से जोखिम को ब्याज दर आय में अथवा निवल ब्याज मार्जिन में परिवर्तन के रूप में आंका जा सकता है । ब्याज दर जोखिम को आंकने और उसके प्रबंधन के लिए बहुत विश्लेषणात्मक तकनीकें हैं । प्रारम्भ में परम्परागत अंतराल का विश्लेषण आस्ति-देयता प्रबंध प्रणाली के प्रारम्भिक चरण में ब्याज दर जोखिम को आंकने के लिए एक उपयुक्त पद्धति माना जाता है । राष्ट्रीय आवास बैंक का आशय उस समय, जब आवास वित्त कंपनियां प्रबंध सूचना प्रणाली के प्रहस्तन और प्राप्ति में पर्याप्त विशेषज्ञता एवं परिष्करण प्राप्त कर लेती हैं, तब अवधि अंतराल विश्लेषण, समय पर अनुरूपण तथा जोखिम को आंकने की आधुनिक तकनीकें अपनाने का है ।
 
 
10.2 अंतराल अथवा असंतुलन जोखिम को विभिन्न समय मध्यान्तरों में अन्तरालों का यथा किसी प्रस्तुत तारीख पर परिकलन करके आंका जा सकता है । अंतराल विश्लेषण तुलन बाह्य मदों सहित दर अस्थिर दायित्वों और दर अस्थिर आस्तियों के बीच असंतुलन आंकता है । कोई आस्ति अथवा देयता सामान्यतया, यथा दर अस्थिर वर्गीकृत की जाती है, यदि -
 

i. विचाराधीन समय मध्यान्तर के भीतर, कोई नकदी प्रवाह है;

ii. मध्यान्तर के दौरान ब्याज दर संविदागत रूप से पुनर्निर्धारित/पुनर्मूल्यांकित होती है;

iii. कथित परिपक्वताओं से पूर्व यह संविदागत रूप से पूर्व संदेय/आहरणीय है ;

iv. यह भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा बैंक दर में परिवर्तनों पर निर्भर करती है ।

 
 
10.3 अन्तराल रिपोर्ट अवशिष्ट परिपक्वता अथवा आगामी पुनर्मूल्यन अवधि में से जो भी पहले आती है, के अनुसार, दर अस्थिर दायित्वों, आस्ति एवं तुलन-पत्र बाह्य मदों समयावधियों में ग्रुप करके तैयार की जानी चाहिए । सभी निवेश, अग्रिम, जमाराशियां, उधार की राशियां, खरीदी गई निधियां, इत्यादि जो एक विनिर्दिष्ट समय सीमा के भीतर परिपक्व/पुनर्मूल्यांकित होती हैं, वे ब्याज दर अस्थिर हैं । इसी प्रकार से, ऋण का कोई भी मूलधन पुनर्भुगतान भी दर अस्थिर है, यदि आवास वित्त कंपनी इसे समयावधि में प्राप्त करने की आशा करती है । इसमें मूलधन का अन्तिम पुनर्भुगतान और अंतरिम किस्तें शामिल हैं । कतिपय आस्तियों एवं दायित्वों की अस्थिर ब्याज की दर होती हैं जो एक संदर्भ दर भिन्न होती हैं और इसलिए इन मदों का पूर्व अवधारित मध्यान्तरों पर पुनर्मूल्यांकन हो जाता है । ऐसी आस्तियां एवं देयता पुनर्मूल्यन के समय दर अस्थिर होती हैं । जहां सावधि जमाराशियों पर ब्याज दरें साधरण रूप से उनके प्रचलन के दौरान नियत की जाती हैं, वहीं अग्रिमों की श्ञंखलाएं मूलभूत रूप से अस्थिर होती हैं । अग्रिमों पर ब्याज दरों का कितने ही अवसरों पर पुनर्मूल्यन प्राथमिक उधार दर में परिवर्तनों के तदनुरूप किया जा सकता है ।
 
 
ब्याज दर अंतराल निम्नलिखित समयावधियों में पहचाना जा सकता है :-
 

i. दिन से 30/31 दिनों (एक महीने) तक

ii. एक महीने से 2 महीनों तक

iii. 2 महीनों से 3 महीनों तक

iv. 3 महीनों से 6 महीनों तक

v. 6 महीनों से 1 वर्ष तक

vi. 1 वर्ष से 3 वर्षों तक

vii. 3 वर्षों से 5 वर्षों तक

viii. 5 वर्षों से 7 वर्षों तक

7 वर्षों से 10 वर्षें तक

ix. 10 वर्षों से अधिक

x. ग़ैर - अस्थिर

 
 
दर अस्थिर आस्तियों एवं दायित्वों की विभिन्न मदों और तुलन-पत्र बाह्य मदों को विभिन्न समयावधियों में वर्गीकृत किया जा सकता है, जैसा कि अनुलग्नक II में स्पष्ट किया गया है और अल्पावधि गतिशील चलनिधि तथा ब्याज दर अस्थिर आस्तियों और दायित्वों के लिए रिपोर्ट करने के फॉर्मेट क्रमश: अनुलग्नक II और अनुलग्नक III में दिए गए हैं ।
 
 
10.4 अन्तराल प्रत्येक समयावधि के लिए दर अस्थिर आस्तियों और दर अस्थिर-दायित्वों के बीच अंतर होता है । सकारात्मक अंतराल उपदर्शित करता है कि इसमें दर अस्थिर दायित्वों की अपेक्षा दर अस्थिर आस्तियां अधिक हैं जबकि ऋणात्मक अंतराल उपदर्शित करता है कि इसमें दर अस्थिर देयता अधिक है । अंतराल रिपोर्टें उपदर्शित करती हैं कि क्या संस्थान एक सकारात्मक अंतराल (दर अस्थिर आस्तियां>दर अस्थिर देयता) रखने से बढ़ती ब्याज दरों से लाभान्वित होने की स्थिति में है अथवा क्या यह ऋणात्मक अंतराल (दर अस्थिर देयता>दर अस्थिर आस्ति) से गिरती ब्याज दरों से भी लाभान्वित होने की स्थिति में है । अत: अंतराल ब्याज दर अस्थिरता को एक उपाय के रूप में प्रयोग किया जा सकता है ।
 
 
10.5 प्रत्येक आवास वित्त कंपनी को निदेशक मंडल/प्रबंधन समिति के अनुमोदन से विभिन्न समयावधियों में वैयक्तिक अंतराल पर विवेकसम्मत सीमा निर्धारित करनी चाहिए । ऐसी विवेकसम्मत सीमा का संबंध कुल आस्तियों, अर्जनकारी आस्तियों अथवा साम्य पूंजी (इक्विटी) से होना चाहिए । ब्याज दर अंतराल सीमा के अतिरिक्त, आवास वित्त कंपनी अपने निदेशक मंडल/आस्तिदेयता समिति के अनुमोदन से, ब्याज दर संचलन पर अपने विचारों के आधार पर, जोखिम पर अर्जन अथवा निवल ब्याज मार्जिन के अनुसार विवेकसम्मत सीमा निर्धारित कर सकती है ।
 
 
सामान्य
 
11.1 जैसा कि परिशिष्ट-I एवं II में उपदर्शित है (चलनिधि एवं ब्याज दर अस्थिर संबंधी) अंतराल रिपोर्टें तैयार करने के लिए विभिन्न समयावधियों में आस्ति और देयता के विभिन्न संघटकों का वर्गीकरण आधार होता है । आवास वित्त कंपनियां जो पिछले आंकड़ों/अनुभव मूलक अध्ययनों के आधार पर आस्ति एवं देयता के विभिन्न संघटकों के व्यावहारिक स्वरूप का उपयुक्त रूप से वर्गीकरण करने में बेहतर साधन संपन्न हैं, वे आस्ति देयता समिति/निदेशक मंडल के अनुमोदन के अध्यधीन, उन्हें समुचित समयावधियों में वर्गीकृत कर सकती थीं । आस्ति देयता समिति/निदेशक मंडल द्वारा अनुमोदित नोट की एक प्रति राष्ट्रीय आवास बैंक को भेजी जाए ।
 
 
11.2 वर्तमान कार्यढांचा आवास वित्त कंपनियों की चलनिधि और ब्याज दर जोखिम पार्श्विका पर जमाराशियों की परिपक्वतापूर्व बंदी तथा ऋणों एवं अग्रिमों के पूर्वभुगतान पर कोई संघात नहीं पकड़ता है । बाज़ार की ब्याज दरों में अस्थिरता की अवधियों में जमाराशियों के परिपक्वता पूर्व आहरण की मात्रा बिल्कुल पर्याप्त है । अत: बाज़ार में चल वस्तुओं में परिवर्तनों के प्रति तुलन-पत्र बाह्य मदों और आस्तियों एवं देयता के भावी व्यवहार का अनुमान करने के लिए, अनुभवमूलक अध्ययनों तथा व्यावहारिक विश्लेषण से समर्थित, उपयुक्त मशीनतंत्र विकसित करना चाहिए तथा विकल्पों की संभावनाओं का अनुमान करना चाहिए ।
 
 
11.3 प्रदत्त निधियों और प्रयुक्त निधियें के लिए चालू बाज़ार दरों के आधार पर मूल्य समनुदेशित करके वैज्ञानिक रूप से विकसित एक आंतरिक अंतरण मूल्यन मॉडल आस्ति देयता-प्रबंध प्रणली के प्रभावी क्रियान्वयन का एक आवश्यक संघटक है । अंतरण मूल्य-मशीनतंत्र मार्जिन का प्रबंधन बढ़ा सकता है अर्थात् उधार देना अथवा ऋण का विस्तार, निधिकरण अथवा देयता और असंतुलन का प्रसार । यह एक स्थान पर ब्याज दर जोखिम के केन्द्रीकरण में भी सहायता है, जो ब्याज दर जोखिम के प्रभावी नियंत्रण एवं प्रबंधन की सुविधा देता है । एक सुपरिभाषित अंतरण मूल्यन प्रणाली भी आस्तियों एवं देयता के मूल्यन के लिए एक युक्तियुक्त कार्यढांचा भी प्रदान करती है ।
 
 
प्रशिक्षण
 
 
प्रस्तावना
 
प्रशिक्षण कार्यक्रम
 

1. आवास वित्त पर अभिमुखीकरण कार्यक्रम

2. आवास वित्त कंपनियों के लिए विनियामक कार्यढांचे पर कार्यक्रम

3. परिसम्पत्तियों के प्रतिभूतिकरण पर कार्यक्रम

4. परियोजनाओं के वित्तपोषण पर कार्यक्रम

5. आवास वित्त कंपनियों में आस्ति-देयता-प्रबंध प्रणाली पर संगोष्ठी

 
 

भावी कार्यक्रम

राष्ट्रीय आवास बैंक का प्रशिक्षण कैलेंडर - 2004

 
 

पंजीकरण प्रपत्र

आवास वित्त कंपनियों के लिए विनियामक विषयों और कार्यढांचे पर कार्यक्रम

 
 
5. उधार की राशि :  
क. आवधिक धन उधार लेना अस्थिर, परिपक्वता पर पुनर्मूल्यन । संबंधित समयावधि में अवशिष्ट परिपक्वता के अनुसार रखा जाएगा ।
ख. अन्यों से उधार लेना  

i) स्थिर

अस्थिर, परिपक्वता पर पुनर्मूल्यन । संबंधित समयावधि में अवशिष्ट परिपक्वता के अनुसार रखा जाएगा ।
ii) अस्थिर दर अस्थिर, आवर्ती/पुनर्मूल्यन तारीख पर पुनर्मूल्य । संबंधित समयावधि में अवशिष्ट परिपक्वता के अनुसार रखा जाएगा ।
6. चालू देनदारियां एवं प्रावधान :  

क. विविध लेनदार

ख. व्यय संदेय

ग. विनिमय व्यवस्था समायोजन लेखा

घ. अग्रिम आय समायोजन लम्बित रहते उधारकर्ताओं से प्राप्त/प्राप्तियां

ङ प्रावधान

च. बांडों/जमाराशियों पर संदेय ब्याज

ग़ैर-अस्थिर

7. रेपो/बिल

पुन: भुनाए गए/फॉरेक्स - रुपया -

विनिमय व्यवस्था (क्रय-विक्रय)

अस्थिर; संबंधित समयावधि में पूर्वताप्राप्त लेनदेन । अवशिष्ट परिपक्वता के अनुसार रखा जाएगा ।
 
 
ख. आस्तियां :
 
 
1. नकद ग़ैर-अस्थिर
2. मार्गस्थ विप्रेषण ग़ैर-अस्थिर

2. भारतीय बैंकों में शेष राशियां

क. चालू खाते में

ख. जमाराशि के खातों में, मांग और अल्प

सूचना पर एवं अन्य स्थानों पर रखने के लिए प्रतिदेय राशि

ग़ैर-अस्थिर

अस्थिर, परिपक्वता पर पुनर्मूल्यन । संबंधित समयावधि में अवशिष्ट परिपक्वता के अनुसार रखा जाएगा ।

4. निवेश  

क. स्थायी आय की प्रतिभूतियां (अर्थात्

सरकारी प्रतिभूतियां, शून्य लाभांश के बांड,

बांड, ऋणपत्र (डिबेंचर) संचयी/ग़ैर-संचयी

शोध्य प्रतिमान शेयर इत्यादि ।

परिपक्वता पर अस्थिर, अवशिष्ट परिपक्वता के अनुसार समयावधि में रखे जाएंगे ।

तथापि, ब्याज के ग़ैर-शोधन के कारण, अनुपयोज्य आस्ति संबंधी मानदंड लागू करके मूल्यांकित बांडों/डिबेंचरों को परिशिष्ट-I में मद सं.बी.7(ए) एवं बी.7(बी) पर विहित समयावधियों में किए गए प्रावधान से अलग दर्शाया जाना चाहिए ।

ख. अस्थिर दर की प्रतिभूतियां अस्थिर; पुनर्मूल्य आगामी पुनर्मूल्यन तारीख पर । पुनर्मूल्यन तारीख अवशिष्ट समय के अनुसार समयावधि में रखी जाएगी ।

ग. साम्य (इक्विटी) शेयर, संपरिवर्तनीय

अधिमान शेयर, गौण/संयुक्त उद्योगों के

शेयर, उद्यम की पूंजीगत यूनिटें ।

ग़ैर-अस्थिर
5. अग्रिम (निष्पादनीय)  

क. भुनाए गए एवं पुन: भुनाए गए विनिमय

बिल, प्रोनोट

परिपक्वता पर अस्थिर । पूर्वता प्राप्त बिलों के अवशिष्ट मीयाद के अनुसार समयावधि में रखे जाएंगे ।

ख. आवधिक ऋण/कंपनी ऋण/अल्पावधि

ऋण (केवल रुपया ऋण)

 
 
 
i) स्थिर दर नकदी प्रवाह/परिपक्वता पर अस्थिर
ii) अस्थिर दर केवल तभी अस्थिर, जब आ.वि.कं. द्वारा जोखिम प्रीमियम बदला जाता है । आवधिक ऋणों की राशि न समयावधियों में रखी जानी चाहिए जो बाज़ार में ब्याज दरों के प्रत्युत्तर में आ.वि.कं. द्वारा अपनी प्राथमिक उधार दर में परिवर्तन करने के लिए, लिए गए समय के तदनुरूप हैं ।
6. ग़ैर-निष्पादित ऋण  

(ईसीजीसी से प्राप्त दावों और प्रावधानों, ब्याज उचंत का निवल)

क. उप-मानक

ख. संदिग्ध एवं हानिप्रद

परिशिष्ट-I की मदों बी.7(ए) एवं बी.7(बी) पर यथा उपदर्शित - समयावधि में रखा जाए ।
7. पट्टे पर आस्तियां

पट्टा आस्तियों पर नकदी प्रवाह ब्याज दरों में परिवर्तन के लिए अस्थिर हैं । पट्टाकृत आस्तियों पर सम्पूर्ण नकदी प्रवाह का नकदी प्रवाहों के समय के अनुसार संबंधित समयावधियों में रखा जाना चाहिए ।

8.स्थिर आस्तियां (पट्टा पर दी गई

आस्तियों को छोड़कर)

ग़ैर-अस्थिर
9. अन्य आस्तियां  

क. अमूर्त आस्तियां एवं वे मदें जो नकदी

प्रवाहों की द्योतक नहीं हैं

प्रवाहों की द्योतक नहीं हैं

ख. अन्य मदें (अर्थात् प्रोद्भूत आय, अन्य

प्राप्य राशियां, कर्मचारी ऋण, इत्यादि

ग़ैर-अस्थिर
 
 
 
 

10. आरक्षित रेपो/विनिमय व्यवस्था (क्रय/विक्रय) पुन: भुनाए गए बिल, व्युत्पन्नी मीयादी प्रोनोट

परिपक्वता पर अस्थिर । पूर्वता प्राप्त लेनदेन की अवशिष्ट परिपक्वता के अनुसार समयावधि में रखे जाएंगे ।
11. अन्य (ब्याज दर) उत्पाद  
क. ब्याज दर विनिमय व्यवस्था/एफआरए अस्थिर; संबंधित समयावधियों में अवशिष्ट परिपक्वता के अनुसार रखे जाएंगे ।
ख. अन्य व्युत्पन्नी जब और जैसे ही लागू हो, तब उपयुक्त रूप से वर्गीकृत किए जाएं ।
 
अनुलग्नक - I
 
 
ढांचागत चलनिधि का विवरण
 
(यथा_____________को)
 
आवास वित्त कंपनी का नाम :
(राशि करोड़ रुपए में)
 
 
क. बाह्य प्रवाह
 
 
मद/समयावधि 1 से 30/31 दिन (एक महीना) एक महीने से अधिक 2 महीनों तक 2 महीनों से अधिक 3 महीनों तक 3 महीनों से अधिक 6 महीनों तक 6 महीनों से अधिक 1 वर्ष तक 1 वर्ष से अधिक 3 वर्षों तक 3 वर्षों से अधिक 5 वर्षों तक

5 वर्षों से अधिक 7 वर्षों तक

7 वर्षों से अधिक 10 वर्षें तक 10 वर्षों से अधिक योग

1. पूंजी

क. साम्य पूंजी (इक्विटी) एवं स्थायी अधिमान शेयर

 

ख. ग़ैर-स्थायी अधिमान शेयर

 
 
 

2. आरक्षित निधियां एवं

अधिशेष

 

3. उपहार, अनुदान, दान

एवं उपकार

 

4. नोट/बांड/डिबेंचर

क. प्लेन वैनिला

बांड/डिबेंचर

 

ख.सन्निहित विकल्पों सहित

बांड/डिबेंचर

 
ग. स्थिर दर नोट  
5. जमाराशियां  
क. जनता से सावधि जमाराशि  
ख. अपरिवर्तनीय डिबेंचर                      
ग. परिवर्तनीय डिबेंचर  

6. उधार की राशि

क. सावधि धन उधार लेना

 
ख. भा.रि.बैंक, सरकार एवं अन्यों से  

चालू देनदारियां एवं प्रावधान

क. विविध लेनदार

 
ख. व्यय संदेय  
ग. प्राप्त अग्रिम आय  

घ. बांडों/जमाराशियों पर

संदेय ब्याज

 
 
 
ङ प्रावधान (अनुपयोज्य आस्तियों के लिए, को छोड़कर)  

8. आकस्मिक देयताएं

क. साख पत्र/गारंटियां

 

ख. संवितरण लम्बित रहते

ऋण की प्रतिबद्धता (बाह्य प्रवाह)

 

ग. अन्य संस्थानों को

प्रतिबद्ध अधिकतम स्वीकृत

(ऋण सीमा (बाह्य प्रवाह)

 

घ. वायदा विनिमय संविदाओं, रुपया/डॉलर

विनिमय व्यवस्था एवं पुन:

भुनाए गए बिलों के मद्दे

बाह्य प्रवाह

 
9. अन्य (विनिर्दिष्ट करें)  
क. कुल बाह्य प्रवाह (क)  
 

ख. अंतर्प्रवाह

 
 
मद/समयावधि 1 से 30/31 दिन (एक महीना) एक महीने से अधिक 2 महीनों तक 2 महीनों से अधिक 3 महीनों तक 3 महीनों से अधिक 6 महीनों तक 6 महीनों से अधिक 1 वर्ष तक 1 वर्ष से अधिक 3 वर्षों तक 3 वर्षों से अधिक 5 वर्षों तक 5 वर्षों से अधिक 7 वर्षों तक 7 वर्षों से अधिक 10 वर्षें तक 10 वर्षों से अधिक योग
1. नकदी  
2. मार्गस्थ विप्रेषण  

3. बैंकों में शेष राशियां

क. चालू खाता

ख. जमाराशि/अल्पावधि जमाराशि

ग. मांग ओर अल्प सूचना

पर प्रतिदेय राशि

 
4. परिशिष्ट-I में गिनाए गए अनुसार, विभिन्न वर्गों में (प्रावधानों का निवल) निवेश  

5. अग्रिम (निष्पादनीय)

क. भुनाए गए एवं पुन: भुनाए गए विनिमय, बिल एवं प्रोनोट

ख. सावधि ऋण (केवल रुपया ऋण)

ग. कंपनी ऋण/अल्पावधि ऋण

 
 
 
 
6. विभिन्न वर्गों के अधीन, (प्रावधानों के निवल तथा प्राप्त ईसीजीसी के दावे) ग़ैर-निष्पादनीय ऋण, जैसा कि परिशिष्ट-I में गिनाए गए हैं)  
7. पट्टा आस्तियों से अंतर्प्रवाह  
8. स्थिर आस्तियां (पट्टा पर आस्तियों को छोड़कर)  

9. अन्य आस्तियां

क. अमूर्त आस्तियां एवं अन्य ग़ैर-नकदी प्रवाह मदें

ख. अन्य प्राप्यनीय आय एवं ब्याज ग. अन्य

 
   

10. अन्य संस्थानों द्वारा प्रतिबद्ध अधिकतम स्वीकृत ऋणसीमा (अंतर्प्रवाह)

 
11. पुन: भुनाए गए बिल  

12. वायदा विनिमय संविदा, डॉलर/रुपया विनिमय व्यवस्था (विक्रय/क्रय) के मद्दे अंतर्प्रवाह

 
 
 
 
 
 
13. अन्य  
ख. कुल अंतर्प्रवाह (ख)  
ग. असंतुलन (ख-क)  
घ. संचयी असंतुलन  
ङ ग यथा क का नकद प्रतिशत  
 
 
अनुलग्नक-II
अल्पावधि गतिशील चलनिधि का विवरण
 
(यथा______________को)
 
 
आवास वित्त कंपनी का नाम
(राशि करोड़ रुपए में)
 

1 - 14 दिन

15 - 28 दिन 29 दिन से 3 महीने 3 - 6 महीने
क. बाह्य प्रवाह  
1. ऋणों एवं अग्रिमों में वृद्धि
2. निवेश में निवल वृद्धि
i) सरकार/अनुमोदित प्रतिभूतियां
ii) बांड/डिबेंचर/शेयर
iii)अन्य
3. सार्वजनिक जमाराशियों, अपरिवर्तनीय डिबेंचरों में निवल वृद्धि
4. विभिन्न स्रोतों से उधार में निवल वृद्धि/बाज़ार को उधार देने में निवल वृद्धि
5. तुलन-पत्र बाह्य मदों के मद्दे बाह्य प्रवाह
6. अन्य बाह्य प्रवाह
 
 
 
कुल बाह्य प्रवाह (क)  
ख. अंतर्प्रवाह
1. निवल नकदी की स्थिति
2. जमाराशियों में निवल वृद्धि
3. निवेश पर ब्याज अंतर्प्रवाह
4. निष्पादनीय अग्रिमों पर ब्याज अंतर्प्रवाह
5. विभिन्न स्रोतों से उधार लेने में निवल वृद्धि
6. तुलन-पत्र बाह्य मदों के मद्दे अंतर्प्रवाह
7. अन्य अंतर्प्रवाह
कुल अंतर्प्रवाह(ख)
ग. असंतुलन (ख-क)
घ. संचयी असंतुलन
ङ कुल बाह्य प्रवाहों के यथा प्रतिशत ग
 
अनुलग्नक - III
ब्याज दर अस्थिरता का विवरण (यथा_______________को)
 
क. बाह्य प्रवाह
मद/समयावधि 1 से 30/31 दिन (एक महीना) 1 महीने से अधिक 2 महीने तक 2 महीने से अधिक 3 महीने तक 3 महीने से अधिक 6 महीने तक 6 महीने से अधिक 1 वर्ष तक

1 वर्ष से अधिक 3 वर्ष तक

3 वर्ष से अधिक 5 वर्ष तक 5 वर्ष से अधिक 7 वर्ष तक 7 वर्ष से अधिक 10 वर्ष तक 10 वर्ष से अधिक स्थिर योग

1. पूंजी

क. साम्य (इक्विटी) एवं स्थायी अधिमान शेयर

 
ख. ग़ैर-स्थायी अधिमान शेयर
2. आरक्षित एवं अधिशेष निधि
3. उपहार, अनुदान, दान एवं उपकार

4. नोट, बांड, डिबेंचर क. प्लेन वैनिला बांड/डिबेंचर

ख. सन्निहित विकल्पों सहित बांड/डिबेंचर
ग. स्थिर दर नोट

5. जमाराशियां क. जनता से सावधि जमाराशियां

ख. असंपरिवर्तनीय डिबेंचर
 

ग. संपरिवर्तनीय डिबेंचर

 

6. उधार की राशि

क. सावधि धन उधार लेना

 
ख. भा.रि.बैंक, सरकार एवं अन्यों से  

7. चालू देनदारियां एवं प्रावधान

क. विविध लेनदार

 
ख. व्यय संदेय  
ग. प्राप्त हुई अग्रिम आय  
घ. बांडों/डिबेंचरों पर संदेय ब्याज  
ङ प्रावधान (अनुपयोज्य आस्तियों से भिन्न)  
9. अन्य (विनिर्दिष्ट करें)  
क. कुल बाह्य प्रवाह (क)  
 
ख. अंतर्प्रवाह
 
1. नकदी
2.मार्गस्थ विप्रेषण

3. बैंकों में शेष राशियां

क. चालू खाते

ख. जमाराशि/अल्पावधि जमाराशियां

ग. मांग एवं अल्प सूचना पर प्रतिदेय राशि

4. निवेश (प्रावधन का निवल) जैसा कि परिशिष्ट-I में गिनाया गया है, विभिन्न वर्गों में
 

5. अग्रिम (निष्पादनीय)

क. पुन: भुनाए गए विनिमय बिल तथा प्रोनोट

ख. सावधि ऋण (केवल रुपया ऋण)

ग. कंपनी ऋण/अल्पावधि ऋण

6. ग़ैर-निष्पादनीय ऋण (परिशिष्ट-I में गिनाए अनुसार, प्रावधान का निवल और विभिन्न वर्गों के अधीन ईसीजीसी के प्राप्त दावे
7. पट्टा पर आस्तियों से अंतर्प्रवाह
8. स्थिर आस्तियां (पट्टा पर आस्तियों को छोड़कर)

9. अन्य आस्तियां

क. अमूर्त आस्तियां एवं अन्य ग़ैर-नकदी प्रवाह मदें

ख. प्राप्यनीय ब्याज एवं आय

ग. अन्य

10. अन्य संस्थानों से प्रतिबद्ध स्वीकृत अधिकतम ऋण सीमा (अंतर्प्रवाह)
11. पुन: भुनाए गए बिल (अंतर्प्रवाह)
12. वायदा विनिमय संविदा, डॉलर-रुपया विनिमय व्यवस्था के मद्दे अंतर्प्रवाह (विक्रय/क्रय) अन्य
ख. कुल अंतर्प्रवाह (ख)
ग. असंतुलन (ख-क)
घ. संचयी असंतुलन
ङ क का यथा प्रतिशत ग
 
 
 
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