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विनियम

राआ_ाÿक(नदि)/डीआरएस/नीति सं.29/2009

02 जून,  2009

सभी पंजीकृत आवास वित्त कंपनियों को

म­ाटदय,

  आवास ऋणों पर आवास वित्त कंपनियों द्वारा अधिक ब्याज वसूली

रा.आ.बैंक को आवास वित्त कंपनियों के ऋणियों से शिकायतें मिलती रहती हैं कि आ.वि. कंपनियों द्वारा अधिक ब्याज और प्रभारों की वसूली की जाती है । अंशत: यह आ.वि. कंपनियों द्वारा निर्धारित ब्याज दरों, सामान्य शुल्क और प्रभारों के बारे में सूचना के प्रकटीकरण एवं पारदर्शिता में कमी के कारण भी होता है । अतएव, आ.वि. कंपनियों को सूचित किया जाता है कि वे ब्याज दर निर्धारण, शुल्क एवं अन्य प्रभारों आदि व ऋणियों की विभिन्न श्टणियों से प्रभारित मार्जिन व जोखिम प्रीमियम संबंधी नीतियों पर पुनर्विचार करें और अपने-अपने बोर्डों से अनुमोदित कराएं ।

2. आ.वि. कंपनियों को यह सुनिश्चित करने के लिए सूचित किया जाता है कि ऋणों से संबंधित नियम एवं शर्तों में पारदर्शिता के बारे में 'उचित प्रक्रिया कोड' पर परिपत्र सं. राआ_ाÿक(नदि)/डीआरएस/नीति सं.16/2006 दिनांक 5 सितम्बर, 2006 में उल्लिखित दिशानिर्देशों को ध्यान में रखते हुए ब्याज दरों तथा प्रभारों का पर्याप्त प्रकटीकरण किया जाए ।

3. आ.वि. कंपनियों को यह भी सूिात किया ााता है कि प्रक्रिया और परिाालनों की निगरानी के लिए आन्तरिक तंत्र को दुरुस्त करें िाससे ऋणियों के साथ संाार में पर्याप्त पारदर्शिता सुनिश्िात हो ।

भवदीय

 

 (आर.एस. गर्ग)

महाप्र_ांधक   

विनियमन एवं पर्यवेक्षण विभाग
 
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