| विनिमय |
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| एनएचबी(एनडी)/डीआरएस/रेपो/पीओएल/1170/2003 |
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| 04 अप्रैल, 2003 |
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| राष्ट्रीय आवास बैंक में पंजीकृत सभी आवास वित्त कंपनियां |
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| प्रिय महोदय, |
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¢विषय : रेपो/प्रत्यावर्तित रेपो लेनदेन के एक समान लेखांकन के लिए दिशा-निर्देश |
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रेपो लेनदेन (संव्यवहार) के संबंध में एक समान लेखांकन सुनिश्चित करने और पारदर्शिता का एक तत्व विहित करने के लिए, सभी आवास वित्त कंपनियों द्वारा किए गए
एक समान लेखांकन सिद्धांत निर्धारित करने का विनिश्चय किया गया है । |
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| 2. एक समान लेखांकन सिद्धांत वित्तीय वर्ष 2003-04 से लागू होंगे । इनके क्रियान्वयन पर बाज़ार के प्रतिभागीगण रेपो निवेश के किसी भी वर्ग से ले सकते हैं । |
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वर्तमान कानून में रेपो का विधिक स्वरूप अर्थात् सीधे क्रय एवं सीधे विक्रय संबंधी लेनदेन यह सुनिश्चित करके यथावत् रखे जाएंगे कि रेपो के अधीन बेची गई (बेचने
निर्दिष्ट किया गया है) प्रतिभूतियों को प्रतिभूतियां के विक्रेता के निवेश खाते से निकाल दिया जाता है और प्रत्यावर्तित रेपो (खरीदने वाले
अस्तित्व को यथा "क्रेता" निर्दिष्ट किया जाता है) के अधीन लाई गई प्रतिभूतियों को प्रतिभूतियों के क्रेता के निवेश खाते में शामिल कर लिया जाता है । |
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4.इस समय रेपो संबंधी लेनदेन की अनुज्ञा राजकोष बिलों और दिनांकित सरकारी प्रतिभूतियों सहित केन्द्र सरकार की प्रतिभूतियों में है । रेपो का प्रथम चरण प्रचलित बाज़ार
दरों पर संविदागत होना चाहिए । इसके अतिरिक्त, रेपो/प्रत्यावर्तित रेपो लेनदेन में प्रोद्भूत प्राप्त/संदत्त/ब्याज और स्पष्ट मूल्य (अर्थात् प्रोद्भूत ब्याज घटाकर कुल नकद प्रतिफल)
का लेखा पृथक रूप से अथवा स्पष्टतया दिया जाना चाहिए । |
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| 5.रेपो/प्रत्यावर्तित का लेखांकन करते समय पालन किए जाने वाले अन्य लेखांकन सिद्धांत निम्न प्रकार से होंगे :- |
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| (i) लाभांश (कूपन) |
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यदि रेपो में दी गई प्रतिभूति के ब्याज के भुगतान की तारीख रेपो अवधि में आती है, तब प्रतिभूति के क्रेता द्वारा प्राप्त किये गये लाभांश (कूपन) को प्राप्ति की तारीख पर विक्रेता को दे दिया जाना चाहिए, क्योंकि द्वितीय चरण में विक्रेता द्वारा संदेय नकद प्रतिफल में कोई भी मध्यवर्ती नकदी प्रवाह शामिल नहीं होता है । जहां क्रेता रेपो अवधि के दौरान कूपन बुक करेगा, वहीं विक्रेता रेपो की अवधि के दौरान लाभांश (कूपन) प्रोद्भूत करेगा । राजकोषीय बिलों जैसी भुनाई गई लिखतों के मामले में, चूंकि कोई लाभांश (कूपन) नहीं है, अत: विक्रेता रेपो की अवधि के दौरान मूल बट्टा दर पर बट्टा प्रोद्भूत करता रहेगा । अत: क्रेता रेपो अवधि में बट्टा प्रोद्भूत नहीं करेगा । |
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(ii) रेपो की ब्याज आय/व्यय : रेपो/प्रत्यावर्तित रेपो संबंधी लेनदेन का द्वितीय चरण पूरा हो जाने के बाद,
क. प्रथम चरण और द्वितीय चरण के बीच प्रतिभूति के स्पष्ट मूल्य में अंतर को क्रमश: क्रेता/विक्रेता की लेखा बहियों में यथा रेपो ब्याज आय/व्यय गिना जाना चाहिए ;
ख. लेनदेन के दोनों चरणों के बीच संदत्त प्रोद्भूत ब्याज में अंतर को, यथास्थिति, यथा रेपो ब्याज/आय/व्यय लेखा दर्शाया जाना चाहिए; और
रेपो ब्याज आय/व्यय लेखा में बकाया शेष को यथा आय अथवा व्यय के रूप में लाभ एवं हानि लेखा में अंतरित किया जाना चाहिए |
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तुलन-पत्र की तारीख पर बकाया रेपो/प्रत्यावर्तित रेपो लेनदेन के बारे में, केवल तुलन-पत्र की तारीख तक प्रोद्भूत आय/व्यय को लाभ एवं हानि लेखा में लिया जाना चाहिए । बकाया लेनदेन के संबंध में पश्चात्वर्ती अवधि के लिए कोई भी रेपो आय/व्यय आगामी लेखांकन अवधि में गिना जाना चाहिए । |
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((iii) बाज़ार के लिए चिन्हित करना
क्रेता प्रतिभूति के निवेश वर्गीकरण के अनुसार प्रत्यावर्तित रेपो लेनदेन में अधिग्रहित प्रतिभूतियों को बाज़ार के लिए चिन्हित करेगा । प्रत्यावर्तित रेपो लेनदेन में अधिग्रहित प्रतिभूतियों का मूल्यांकन वैसी ही प्रकृति की प्रतिभूतियों के संबंध में उनकी ओर से पालन किए गए मानदंडों के मूल्यांकन के अनुसार हो सकता है ।
यथा तुलन-पत्र की तारीख को बकाया रेपो लेनदेन के संबंध में
क. क्रेता तुलन-पत्र की तारीख पर प्रतिभूतियां बाजार के लिए चिन्हित करेगा और उनका लेखा उसी प्रकार देगा जैसा कि आवास वित्त कंपनी (रा.आ.बैंक) निर्देश, 2001 में विहित वर्तमान मूल्यांकन मानदंडों में निर्धारित किया गया है ।
ख. विक्रेता लाभ एवं हानि लेखा में मूल्य के अंतर के लिए व्यवस्था करेगा और तुलन-पत्र में "अन्य आस्तियों" में इस अंतर को दर्शाएगा, यदि रेपो में प्रदत्त प्रतिभूति का विक्रय मूल्य बही मूल्य से कम है ।
ग. विक्रेता लाभ एवं हानि लेखा के उद्देश्य से मूल्य अंतर की अनदेखी करेगा किन्तु इस अंतर को तुलन-पत्र में "अन्य देयताएं" में दर्शाएगा । यदि रेपो में प्रदत्त प्रतिभूति का विक्रय मूल्य बही मूल्य से अधिक है, और
घ. इसी प्रकार से तुलन-पत्र की तारीख को बकाया रेपो/प्रत्यावर्तित रेपो लेनदेन में संदत्त/प्राप्त प्रोद्भूत ब्याज को तुलन-पत्र में यथा "अन्य आस्तियां" अथवा "अन्य देयताएं" दर्शाया जाना चाहिए ।
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(iv) पुन: क्रय पर बही मूल्य
विक्रेता द्वितीय चरण में पुन: खरीद (जैसा कि प्रथम चरण की तारीख को लेखा बहियों में विद्यमान है) मूल बही मूल्य में रेपो लेखा नामे डालेगा ।
(v) प्रकटीकरण
÷तुलन-पत्र की लेखा पर टिप्पणियों में बैंक की ओर से निम्नलिखित प्रकटीकरण किया जाना चाहिए :-
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(लाख रुपए में)
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वर्ष के दौरान न्यूनतम बकाया |
वर्ष के दौरान अधिकतम बकाया |
वर्ष के दौरान दैनिक औसत बकाया |
यथा 31 मार्च को |
रेपो में बेची गई प्रतिभूतियां |
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प्रत्यावर्तित रेपो में खरीदी गई प्रतिभूतियां |
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(vi) लेखांकन पद्धति
सोदाहरण पालन की जाने वाली लेखांकन पद्धति अनुलग्नक-I एवं II में दी गई है । विभिन्न लेखांकन प्रणालियां रखने वाले विपणन प्रतिभागीगण उनसे भिन्न लेखा शीर्षों का उपयोग कर सकते हैं जो सोदाहरणों में प्रयोग हुए हैं और ऊपर निरूपित लेखांकन सिद्धांतों से कोई विपथन नहीं होना चाहिए । इसके अतिरिक्त, रेपो लेनदेन से उत्पन्न विवाद्यों का निवारण करने के लिए प्रतिभागीगण भारतीय स्थायी आय मुद्रा बाज़ार एवं व्युत्पन्नी सहयोजन (एफआईएमएमडीए) की ओर से निर्णीत प्रलेखन के अनुसार द्विपक्षीय मास्टर रेपो करार पर हस्ताक्षर करने के लिए विचार कर सकते हैं ।
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| भवदीय, |
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ह./-
(ए.के.सोहानी)
कार्यपालक निदेशक
संलग्न : यथोपरि |
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रेपो/प्रत्यावर्तित रेपो लेनदेन के एक समान लेखांकन के लिए संस्तुत लेखांकन पद्धति |
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क. निम्नलिखित खाते खोले जाएं, अर्थात् i) रेपो खाता, ii) रेपो मूल्य समायोजन खाता, iii) रेपो ब्याज समायोजन खाता, iv) रेपो ब्याज व्यय खाता, v) रेपो ब्याज आय खाता, vi) प्रत्यावर्तित रेपो खाता, vii) प्रत्यावर्तित रेपो मूल्य समायोजन खाता और viii) प्रत्यावर्तित रेपो ब्याज समायोजन खाता ।
ख. रेपो के अधीन बेची/खरीदी गई प्रतिभूतियों का एक सीधे क्रय/विक्रय के रूप में लेखा दिया जाना चाहिए ।
ग. प्रतिभूतियों को उसी बही मूल्य पर लेखा बहियों में प्रविष्ट और निष्कासित किया जाना चाहिए । परिचालनात्मक सुविधा के लिए, भारित औसत लागत पद्धति, जिससे निवेश उनकी भारित औसत लागत पर लेखा बहियों में ले जाया जाता है, अपनाई जा सकती है ।
घ. किसी रेपो लेनदेन में प्रतिभूतियां प्रथम चरण में बाज़ार से संबंधित मूल्य पर बेची जानी और द्वितीय चरण में व्युत्पन्न मूल्य पर पुन: खरीद ली जानी चाहिएं । क्रय और विक्रय का लेखा रेपो खाते में रखा जाना चाहिए ।
ङ रेपो खाता में शेष को तुलन-पत्र के उद्देश्यों के लिए बैंक के निवेश खाते से निवल किया जाना चाहिए
च. रेपो के प्रथम चरण में बाज़ार मूल्य एवं बही मूल्य में अंतर रेपो मूल्य समायोजन खाता में लिखा जाना चाहिए । इसी प्रकार से रेपो के द्वितीय चरण में, व्युत्पन्न मूल्य एवं बही मूल्य के बीच अंतर रेपो मूल्य समायोजन खाता में लिखा जाना चाहिए ।
प्रत्यावर्तित रेपो
छ. किसी प्रत्यावर्तित रेपो लेनदेन में, प्रतिभूतियां प्रथम चरण में प्रचलित बाज़ार मूल्य पर खरीदी जानी चाहिए और द्वितीय चरण में व्युत्पन्न मूल्य पर बेच दी जानी चाहिए । क्रय और विक्रय का लेखा प्रत्यावर्तित रेपो खाता में दिया जाना चाहिए
ज. प्रत्यावर्तित रेपो खाते में शेष तुलन-पत्र उद्देश्यों के लिए निवेश लेखा का भाग होना चाहिए, सांविधिक चलनिधि अनुपात के उद्देश्यार्थ गिना जाना चाहिए, यदि प्रत्यावर्तित रेपो लेनदेन में अधिग्रहित प्रतिभूतियां अनुमोदित प्रतिभूतियां हैं ।
झ. प्रत्यावर्तित रेपो में खरीदी गई प्रतिभूति लेखा बहियों में (खंडित अवधि के ब्याज को छोड़कर) बाज़ार दर पर प्रविष्ट होगी । प्रत्यावर्तित रेपो के दूसरे चरण में बही मूल्य एवं व्युत्पन्न मूल्य के बीच अंतर को प्रत्यावर्तित रेपो मूल्य समायोजन खाता में लिखा जाना चाहिए ।
रेपो/प्रत्यावर्तित रेपो से संबंधित अन्य पहलू
ञ. यदि रेपो में प्रदत्त प्रतिभूति के ब्याज के भुगतान की तारीख रेपो अवधि में पड़ती है, तब, प्रतिभूति के क्रेता द्वारा प्राप्त लाभांश (कूपन) को प्राप्ति की तारीख पर विक्रेता को दे दिया जाना चाहिए क्योंकि द्वितीय चरण में विक्रेता की ओर से संदेय नकद प्रतिफल में कोई मध्यवर्ती नकदी प्रवाह शामिल नहीं होता है ।
ट. रेपो/प्रत्यावर्तित मूल्य समायोजन खाता में प्रथम और द्वितीय चरण में लिखी गई राशियों के बीच अंतर को यथास्थिति, रेपो ब्याज व्यय खाता अथवा रेपो ब्याज आय खाता में अंतरित किया जाना चाहिए ।
ठ. प्रथम और द्वितीय चरणों में खंडित अवधि का प्रोद्भूत ब्याज, यथास्थिति, रेपो ब्याज समायोजन खाता अथवा प्रत्यावर्तित रेपो ब्याज समायोजन खाता में लिखा जाएगा । परिणामस्वरूप, प्रथम और द्वितीय चरणों में इस खाते में लिखी गई राशियों का अंतर यथास्थिति रेपो ब्याज व्यय खाता अथवा रेपो ब्याज आय खाता में अंतरित किया जाएगा ।
रेपो में बकाया के लिए लेखांकन अवधि के अंत में, रेपो/प्रत्यावर्तित रेपो मूल्य समायोजन खाता और रेपो/प्रत्यावर्तित रेपो ब्याज समायोजन खाता में शेष राशियों को तुलन-पत्र में, यथास्थिति, या तो अनुसूची-11 "अन्य आस्तियों" में मद -VI "अन्यों" के अधीन अथवा (प्रावधान सहित) अनुसूची-5 में मद-IV के अधीन दर्शाया जाना चाहिए ।
ढ. चूंकि लेखांकन अवधि के अंत में रेपो मूल्य समायोजन खाता में ऋण शेष बकाया रेपो लेनदेन में प्रदत्त प्रतिभूतियों के संबंध में व्यवस्था नहीं की गई हानियों के द्योतक होते हैं, अत: लाभ एवं हानि लेखा में उनके लिए एक प्रावधान करना अनिवार्य होता है ।
लेखांकन अवधि के अंत में, बकाया रेपो/प्रत्यावर्तित रेपो लेनदेन के संबंध में ब्याज के प्रोद्भवन को दर्शाने के लिए, क्रमश: क्रेता/विक्रेता की लेखा बहियों में रेपो ब्याज आय/व्यय को दर्शाने हेतु लाभ एवं हानि लेखा में समुचित प्रविष्टियां की जानी चाहिएं और उसे एक प्रोद्भूत आय/व्यय के रूप में नामे डाला/जमा किया जाना चाहिए किन्तु देय के रूप में नहीं । की गई ऐसी प्रविष्टियां आगामी लेखांकन अवधि के प्रथम कार्य दिवस को उलट दी जानी चाहिएं ।
ब्याज (लाभांश (कूपन) वाली लिखतों के संबंध में, क्रेता रेपो की अवधि के दौरान ब्याज प्रोद्भूत करेगा । राजकोषीय बिलों जैसी बट्टागत लिखतों में रेपो के संबंध में, विक्रेता अधिग्रहण के समय मूल प्रतिफल पर आधारित रेपो की अवधि में बट्टा प्रोद्भूत करेगा ।
लेखांकन अवधि के अंत में (उन रेपों, जो अभी तक बकाया हैं, के लिए शेष को छोड़कर) रेपो ब्याज समायोजन खाता और प्रत्यावर्तित रेपो ब्याज समायोजन खाता में ऋण शेष रेपो ब्याज व्यय खाता में अंतरित किया जाना चाहिए और (उन रेपों, जो अभी तक बकाया हैं, के शेष को छोड़कर) रेपो ब्याज समायोजन खाता और प्रत्यावर्तित रेपो ब्याज में जमा शेष रेपो ब्याज आय खाता में अंतरित किया जाना चाहिए ।
इसी प्रकार से, लेखांकन अवधि के अंत में (उन रेपों, जो अभी तक बकाया हैं, के लिए शेष को छोड़कर) रेपो/प्रत्यावर्तित रेपो मूल्य समायोजन खाता में ऋण शेष रेपो ब्याज व्यय खाता में अंतरित किया जाना चाहिए और (उन रेपों, जो अभी तक बकाया हैं, के लिए शेष को छोड़कर) रेपो/प्रत्यावर्तित रेपो मूल्य समायोजन खाता में जमा शेष रेपो ब्याज आय खाता में अंतरित किया जाना चाहिए ।
निदर्शी उदाहरण अनुलग्नक-II में दिए गए हैं :-
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अनुलग्नक-II |
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रेपो/प्रत्यावर्तित रेपो लेनदेन के एक समान लेखांकन के लिए निदर्शी उदाहरण |
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क. लाभांश (कूपन) वाली प्रतिभूति का रेपो/प्रत्यावर्तित रेपो
1. किसी लाभांश (कूपन) वाली प्रतिभूति में रेपो का विवरण :- |
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रेपो के अधीन प्रदत्त प्रतिभूति |
11.43% 2015 |
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लाभांश (कूपन) के भुगतान की तारीख |
7 अगस्त एवं 7 फरवरी |
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रेपो के अधीन प्रदत्त प्रतिभूति का बाज़ार मूल्य (अर्थात् प्रथम चरण में प्रतिभूति का मूल्य)
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113.00 रुपए |
(1) |
रेपो की तारीख |
19 जनवरी, 2003 |
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रेपो के ब्याज की दर |
7.75% |
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रेपो की अवधि |
3 दिन |
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प्रथम चरण में खंडित अवधि के लिए ब्याज * |
11.43%x162/360x100=5.1435 |
(2) |
प्रथम चरण के लिए नकद प्रतिफल |
(1) + (2) = 118.1435 |
(3) |
रेपो ब्याज ** |
118.1435x3/365x7.75%=0.0753 |
(4) |
द्वितीय चरण के लिए खंडित अवधि के लिए ब्याज
¤¡¸¸ Ó ¸ |
11.43% x 165/360x100=5.2388 |
(5) |
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(3)+(4)-(5)=118.1435+0.0753-5.2388=112.98 |
(6) |
द्वितीय चरण के लिए नकद प्रतिफल |
(5)+(6)=112.98+5.2388=118.2188 |
(7) |
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* 30/360 दिन गिनती परम्परा पर आधारित दिनों की संगणना
** बहुत सी मुद्रा बाज़ार की लिखतों के लिए लागू वास्तविक/365 दिन गिनती परम्परा पर आधारित दिनांक की संगणना
2. प्रतिभूति के विक्रेता के लिए लेखांकन (गिनती)
हम यह मान लेते हैं कि विक्रेता द्वारा प्रतिभूति 120.0000 रुपए के बही मूल्य पर रखी हुई थी
प्रथम चरण का लेखांकन |
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नामे |
जमा |
›नकद रेपो खाता |
118.1435 |
120.0000 (बही मूल्य) |
रेपो मूल्य समायोजन खाता |
7.0000 (बही मूल्य एवं रेपो मूल्य में अंतर) |
|
रेपो ब्याज समायोजन खाता |
|
5.1435 |
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| द्वितीय चरण का लेखांकन |
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नामे |
जमा |
रेपो लेखा रेपो मूल्य समायोजन खाता |
120.0000 |
7.02 (बही मूल्य एवं द्वितीय चरण के मूल्य में अंतर)
|
| |
5.2388 |
118.2188 |
|
| |
रेपो लेनदेन के द्वितीय चरण के अंत में रेपो मूल्य समायोजन खाता एवं रेपो ब्याज समायोजन खाता के संबंध में शेष रेपो ब्याज व्यय खाता में अंतरित किए जाते हैं । इन खातों में शेष के विश्लेषण के लिए, बही खाता की प्रविष्टियां नीचे दर्शाई जाती हैं :- |
| |
| रेपो मूल्य समायोजन खाता |
| |
| |
नामे |
जमा |
प्रथम चरण के लिए मूल्य में अंतर |
7.00 |
द्वितीय चरण के लिए मूल्य में अंतर |
7.02 |
रेपो ब्याज व्यय खाता में अग्रनीत शेष
|
0.02 |
|
|
योग |
7.02 |
योग |
7.02 |
|
| |
| |
रेपो ब्याज समायोजन खाता |
| |
| |
नामे |
जमा |
द्वितीय चरण के लिए खंडित अवधि का ब्याज |
5.2388 |
प्रथम चरण के लिए खंडित अवधि का ब्याज |
5.1435 |
| |
|
रेपो ब्याज व्यय खाता में अग्रनीत शेष |
0.0953 |
योग |
5.2388 |
योग |
5.2388 |
|
| |
| |
रेपो ब्याज व्यय खाता |
| |
| |
नामे |
जमा |
रेपो ब्याज समायोजन खाता से शेष |
0.0953 |
रेपो मूल्य समायोजन खाता से शेष |
0.0200 |
| |
|
लाभ एवं हानि लेखा में अग्रनीत शेष |
0.0753 |
योग |
0.0953 |
योग |
0.0953 |
|
| |
3. प्रतिभूति के क्रेता के लिए लेखांकन
जब प्रतिभूति खरीदी जाती है, तब इसके साथ इसका बही मूल्य भी बताया जाएगा । अत: बाज़ार मूल्य ही प्रतिभूति का बही मूल्य है । —
प्रथम चरण का लेखांकन : |
| |
| |
नामे |
जमा |
प्रत्यावर्तित रेपो खाता |
113.0000 |
|
प्रत्यावर्तित रेपो ब्याज समायोजन खाता |
113.0000 |
|
नकदी लेखा |
|
118.1435 |
|
| |
| द्वितीय चरण का लेखांकन : |
| |
| |
नामे |
जमा |
नकदी लेखा |
118.2188 |
|
प्रत्यावर्तित मूल्य समायोजन खाता (प्रथम एवं द्वितीय चरण के मूल्यों में अंतर) |
0.0200 |
|
प्रत्यावर्तित रेपो खाता |
|
113.0000 |
प्रत्यावर्तित रेपो ब्याज समायोजन खाता |
|
5.2388 |
|
| |
इन खातों में प्रत्यावर्तित रेपो के द्वितीय चरण के अंत में प्रत्यावर्तित रेपो ब्याज समायोजन खाता और प्रत्यावर्तित रेपो मूल्य समायोजन खाता के संबंध में शेष रेपो ब्याज आय खाता में अंतरित किए जाते हैं । इन दोनों खातों में शेष के विश्लेषण के लिए खाता बही की प्रविष्टियां नीचे दर्शाई गई हैं :-
प्रत्यावर्तित रेपो मूल्य समायोजन खाता
|
नामे |
जमा |
प्रथम चरण और द्वितीय चरण के मूल्यों में अंतर |
0.0200 |
रेपो ब्याज आय खाता में शेष |
0.0200 |
योग |
0.0200 |
योग |
0.0200 |
|
| |
प्रत्यावर्तित रेपो ब्याज समायोजन खाता
|
| |
नामे |
जमा |
प्रथम चरण के लिए खंडित अवधि का ब्याज |
5.1435 |
द्वितीय चरण के लिए खंडित अवधि का ब्याज |
5.2388 |
रेपो ब्याज आय खाता में अग्रनीत शेष |
0.0953 |
|
|
योग |
5.2388 |
योग |
5.2388 |
|
| |
| |
प्रत्यावर्तित रेपो ब्याज आय खाता |
| |
नामे |
जमा |
प्रथम एवं द्वितीय चरण के मूल्यों में अंतर |
0.0200 |
प्रत्यावर्तित रेपो ब्याज समायोजन खाता से शेष |
0.0953 |
लाभ एवं हानि लेखा में अग्रनीत शेष |
0.0753 |
|
|
योग |
0.0953 |
योग |
0.0953 |
|
| |
| |
4. जब लेखांकन अवधि किसी मध्यवर्ती दिन को समाप्त हो रही हो, तब अतिरिक्त लेखांकन प्रविष्टियां एक लाभांश (कूपन) वाली प्रतिभूति पर किसी रेपो/प्रत्यावर्तित रेपो लेनदेन में की जाएंगी ।
लेनदेन का चरण |
प्रथम चरण |
लेखांकन अवधि की समाप्ति |
द्वितीय चरण |
| तारीखें |
19 जनवरी, 03 |
21 जनवरी, 03* |
22 जनवरी, 03 |
|
| |
| |
| प्रथम चरण एवं द्वितीय चरण के बीच प्रतिभूति के स्पष्ट मूल्य में अंतर को तुलन-पत्र की तारीख तक प्रभाजित किया जाना चाहिए और विक्रेता/क्रेता की लेखा बहियों में क्रमश: यथा रेपो ब्याज/व्यय दर्शाया जाना चाहिए एवं प्रोद्भूत किन्तु देय नहीं किसी आय/व्यय के रूप में नामे/जमा किया जाना चाहिए । प्रोद्भूत किन्तु देय नहीं आय/व्यय के अधीन शेष को तुलन-पत्र में ले जाया जाना चाहिए । |
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क्रेता द्वारा प्रोद्भूत लाभांश (कूपन) को रेपो ब्याज आय खाता में जमा किया जाना चाहिए । "रेपो/प्रत्यावर्तित रेपो मूल्य समायोजन खाता और रेपो/प्रत्यावर्तित रेपो ब्याज समायोजन खाता" में कोई प्रविष्टियां नीचे दर्शाई जाती हैं :-
क. 21 जनवरी, 2003 को विक्रेता की खाता बहियों में प्रविष्टियां |
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| |
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नामे |
जमा |
रेपो ब्याज आय खाता (लाभ एवं हानि लेखा में अंतरित किए जाने वाले खाता के अधीन शेष) |
|
0.0133 (दो दिनों, अर्थात् तुलन-पत्र के दिन तक मूल्य अंतर के प्रभाजन के ज़रिए रेपो मूल्य समायोजन खाता में 0.0133 ) |
देय नहीं, किन्तु प्रोद्भूत रेपो ब्याज आय |
0.0133 |
|
|
| |
* 21 जनवरी, 2003 को तुलन-पत्र की तारीख माना जाता है ।
ख. 21 जनवरी, 2003 को विक्रेता की खाता बहियों में प्रविष्टियां |
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लेखा शीर्ष |
नामे |
जमा |
प्रोद्भूत, किंतु देय नहीं, रेपो ब्याज आय |
0.0133 |
|
लाभ एवं हानि लेखा |
|
0.0133 |
|
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| ग. 21 जनवरी, 2003 को क्रेता की लेखा बहियों में प्रविष्टियां |
| |
|
नामे |
जमा |
प्रोद्भूत, किंतु देय नहीं, रेपो ब्याज आय |
0.0502 |
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रेपो ब्याज आय खाता (लाभ एवं हानि लेखा में अंतरित किए जाने वाले शेष |
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0.0502 (0.0635* रुपए का 3 दिन का प्रोद्भूत ब्याज - 0.0133 रुपए के स्पष्ट मूल्य में अंतर का प्रभाजन) |
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* सरलता के लिए, प्रोद्भूत ब्याज 2 दिनों के लिए माना गया है ।
21 जनवरी, 2003 को क्रेता की लेखा बहियों में प्रविष्टियां |
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लेखा शीर्ष |
नामे |
जमा |
रेपो ब्याज आय खाता |
0.0502 |
|
लाभ एवं हानि लेखा |
|
0.0502 |
|
| |
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विक्रेता और क्रेता द्वारा प्रोद्भूत रेपो ब्याज में अंतर रेपो के लिए प्रदत्त प्रतिभूति पर विक्रेता द्वारा छोड़ दिए गए ब्याज के मद्दे है ।
ख. राजकोषीय बिलों के लिए रेपो/प्रत्यावर्तित रेपो
1. किसी राजकोषीय बिल पर रेपो का विवरण |
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रेपो में प्रदत्त प्रतिभूति |
28 फरवरी, 2003 को परिपक्व हो रहे राजकोषीय बिल - भारत सरकार के 91 दिन |
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रेपो में प्रदत्त प्रतिभूति का मूल्य |
96.0000 रुपए |
(1) |
रेपो की तारीख |
19 जनवरी, 2003 |
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रेपो ब्याज की दर |
7.75% |
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रेपो की अवधि |
3 दिन |
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प्रथम चरण के लिए कुल नकद प्रतिफल |
96.0000 रुपए |
(2) |
रेपो का ब्याज |
0.0612 |
(3) |
द्वितीय चरण के लिए मूल्य |
(2) + (3) = 96.0000 + 0.0612 = 96.0612 |
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द्वितीय चरण के लिए नकद प्रतिफल |
96.0612 |
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2. प्रतिभूति के विक्रेता के लिए लेखांकन
हम यह मान लेते हैं कि विक्रेता द्वारा प्रतिभूति 95.0000 रुपए के बही मूल्य पर रखी गई थी
प्रथम चरण का लेखांकन : |
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नामे |
जमा |
रेपो नकदी लेखा |
96.0000 |
95.0000 (बही मूल्य) |
रेपो मूल्य समायोजन खाता |
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1.0000 (बही मूल्य एवं रेपो मूल्य में अंतर) |
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| द्वितीय चरण का लेखांकन : |
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95.0000 |
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रेपो मूल्य समायोजन खाता |
1.0612 (बही मूल्य एवं द्वितीय चरण के मूल्य में अंतर) |
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नकदी लेखा |
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96.0612 |
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द्वितीय चरण के लेनदेन की समाप्ति पर रेपो मूल्य समायोजन खाता के संबंध में शेष को रेपो ब्याज व्यय खाता में अंतरित किया जाता है । इस खाता में शेष के विश्लेषण के लिए खाता बही की प्रविष्टियां दर्शाई जाती हैं :- |
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नामे |
जमा |
द्वितीय चरण के मूल्य में अंतर |
1.0612 |
प्रथम चरण के लिए मूल्य में अंतर |
1.0000 |
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रेपो ब्याज व्यय खातों में अग्रनीत शेष |
0.0612 |
योग |
1.0612 |
योग |
1.0612 |
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| रेपो ब्याज व्यय खाता |
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नामे |
जमा |
रेपो मूल्य समायोजन से शेष |
0.0612 |
लाभ एवं हानि लेखा में अग्रनीत शेष |
0.0612 |
लेखा |
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|
योग |
0.0612 |
योग |
0.0612 |
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विक्रेता रेपो अवधि के दौरान मूल बट्टा दरों पर बट्टा प्रोद्भूत करता रहेगा ।
3. प्रतिभूति के क्रेता के लिए लेखांकन
जब प्रतिभूति खरीदी जाती है, तब इसके साथ बही मूल्य होगा । अत: बाज़ार मूल्य ही प्रतिभूति का बही मूल्य है ।
प्रथम चरण का लेखांकन |
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नामे |
जमा |
प्रत्यावर्तित रेपो खाता |
96.0000 |
|
नकदी लेखा |
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96.0000 |
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| द्वितीय चरण का लेखांकन |
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नामे |
जमा |
नकदी लेखा |
96.0612 |
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रेपो ब्याज आय खाता (प्रथम एवं द्वितीय चरण के मूल्यों में अंतर) |
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0.0612 |
प्रत्यावर्तित रेपो खाता |
|
96.0000 |
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Çक्रेता रेपो की अवधि के दौरान बट्टा प्रोद्भूत नहीं करेगा ।
4. जब लेखांकन अवधि किसी मध्यवर्ती दिन को समाप्त हो रही हो, तब किसी राजकोषीय बिल पर किसी रेपो/प्रत्यावर्तित रेपो लेनदेन पर अतिरिक्त प्रविष्टियां की जाएंगी । |
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लेनदेन संबंधी चरण --> |
प्रथम चरण |
तुलन-पत्र की तारीख |
द्वितीय चरण |
तारीख -> |
19 जनवरी, 03 |
21 जनवरी, 03* |
22 जनवरी, 03 |
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* 21 जनवरी, 2003 को तुलन-पत्र की तारीख माना जाता है ।
क. 21 जनवरी, 2003 को विक्रेता की खाता बहियों में प्रविष्टियां |
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लेखा शीर्ष |
नामे |
जमा |
रेपो ब्याज व्यय खाता (दो दिनों के लिए रेपो ब्याज के प्रभाजन के बाद) (इस खाता के अधीन शेष को लाभ एवं हानि लेखा में अंतरित किया जाएगा) |
0.0408 |
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प्रोद्भूत, किन्तु देय नहीं रेपो ब्याज व्यय |
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0.0408 |
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| ख. 21 जनवरी, 2003 को विक्रेता की खाता बहियों में प्रविष्टियां |
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नामे |
जमा |
रेपो ब्याज आय खाता |
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0.0408 |
लाभ एवं हानि लेखा |
0.0408 |
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| ग. 21 जनवरी, 2003 को विक्रेता की खाता बहियों में प्रविष्टियां |
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लेखा शीर्ष |
नामे |
जमा |
प्रोद्भूत, किंतु देय नहीं, रेपो ब्याज व्यय |
0.0408 |
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रेपो ब्याज आय खाता (इस खाता के अधीन शेष को लाभ एवं हानि लेखा में अंतरित किया जाएगा) |
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0.0408 |
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| घ. 21 जनवरी, 2003 को क्रेता की लेखा बहियों में की गई प्रविष्टियां |
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लेखा शीर्ष |
नामे |
जमा |
रेपो ब्याज आय खाता |
0.0408 |
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लाभ एवं हानि लेखा |
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0.0408 |
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