वर्ष 2007-08 का केन्द्रीय बजट प्रस्तुत करते समय, वित्त मंत्री ने अपने भाषण के अनुच्छेद-89 में घोषणा की थी कि राष्ट्रीय आवास बैंक (रा.आ.बैंक) एक रिवर्स मॉर्टगेज (विपरीत बंधक) योजना वरिष्ठ नागरिकों के लिए शुरू करेगा ।
पूर्वोक्त योजना के प्रसंग में उससे उठने वाले कराधान संबंधी मुद्दों का समाधान करना आवश्यक है । पहला मुद्दा है कि क्या रिवर्स मॉर्टगेज (विपरीत बंधक) ऋण योजना के अधीन ऋण प्राप्त करने के लिए संपत्ति का बंधक आयकर अधिनियम के अर्थ के भीतर अंतरण है जिससे पूंजी अभिलाभ को बढ़ावा मिलता है । आयकर अधिनियम की धारा 2(47) अंतरण की एक सम्मिलित परिभाषा उपबंधित करती है । इसके अतिरिक्त, संपत्ति अंतरण अधिनियम के अर्थ के भीतर बंधकों के कुछ प्रकार शामिल हैं । इसीलिए कतिपय मामलों में संपत्ति का कोई भी अंतरण आयकर अधिनियम की धारा 2(47) के अर्थ के भीतर एक अंतरण है । परिणामस्वरूप, किसी संपत्ति के बंधक से उत्पन्न किसी भी लाभ से आयकर अधिनियम की धारा 45 के अधीन पूंजी अभिलाभ को बढ़ावा मिल सकता है । तथापि, रिवर्स मॉर्टगेज (विपरीत बंधक) के प्रसंग में, किसी मकान के बंधक के लिए नकदी प्रवाह की एक धारा बनाए रखने का आशय है और संपत्ति को संक्रामित करना नहीं ।
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 47 में एक नया खंड (xvi) यह उपबंधित करने के लिए निविष्ट किया गया है कि किसी रिवर्स मॉर्टगेज (विपरीत बंधक) योजना के अधीन लेनदेन में किसी भी पूंजीगत आस्ति का केन्द्र सरकार द्वारा किया और अधिसूचित किया गया कोई अंतरण यथा अंतरण नहीं माना जाएगा ।
दूसरा मुद्दा है कि क्या किसी रिवर्स मॉटेगेज (विपरीत बंधक) योजना के अधीन या तो किस्तों में अथवा एकमुश्त प्राप्त हुआ ऋण आय होता है । ऐसे ऋण की प्राप्ति पूंजीगत प्राप्ति की प्रकृति में होती है । आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10 में संशोधन यह उपबंधित करने के लिए किया गया है कि किसी व्यक्ति द्वारा या तो एकमुश्त अथवा किस्त में प्राप्त की गई राशि, आयकर अधिनियम की धारा 47 के खंड (xvi) में निर्दिष्ट रिवर्स मॉर्टगेज (विपरीत बंधक) के किसी लेनदेन में कुल आय में शामिल नहीं की जाएगी ।
तथापि, किसी रिवर्स मॉर्टगेज (विपरीत बंधक) योजना में कोई भी उधारकर्ता (पूंजी अभिलाभ पर कर की प्रकृति में) केवल ऋण वसूल करने के उद्देश्य से बंधकग्राही द्वारा बंधक रखी संपत्ति के अन्य संक्रामण पर आयकर का भागी होगा । |