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राआबैं कैपिटल गेन बौंड्स

वहनीय आवास के लिए भवन निर्माण वित्त का पुनर्वित्त

 

उत्पत्ति
यह योजना राष्ट्रीय नगर आवास एवं पर्यावास नीति, 2007 से निकलती है, जिसने शहरी क्षेत्रों में आवास की ज़रूरत और आवास पर बढ़ते दबाव तथा संबंधित आधारिक सुविधाओं के प्रति उपायों पर बल दिया है । यह नीति शहरी ग़रीबों पर विशेष बल देने के साथ "सभी के लिए वहनीय आवास" के लक्ष्य प्राप्त करने के लिए विभिन्न प्रकार की सार्वजनिक-निजी भागीदारी के संवर्धन की मांग करती है । नीति का लक्ष्य समाज के सभी वर्गों को वहनीय मूल्यों पर आश्य, सेवाएं तथा भूमि की समान आपूर्ति पर सुनिश्चित करने की दृष्टि से देश में पर्यावास का धारणीय विकास है । अंतिम लक्ष्य वित्तीय क्षेत्र के सक्रिय हस्तक्षेप के माध्यम से एक मांग प्रेरित दृष्टिकोण की ओर ले जाना है ।

इस प्रयास में बैंककारी क्षेत्र की संबद्धता को प्रोत्साहित और सहायता करने के लिए तथा अपनी विकासात्मक भूमिका के भाग के रूप में राष्ट्रीय आवास बैंक समाज के उन वर्गों, जो पुनर्वित्त सहायता के ज़रिए साधारण मूल्य की एक आवासीय इकाई वहन कर सकते हैं, पर लक्षित आवासीय गतिविधियों के लिए सहायता देना चाहता है । राष्ट्रीय आवास बैंक प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित मकानों सहित प्रवासी शमिकों अथवा केन्द्र सरकार/राज्य सरकार की वैसी ही अन्य किसी योजना के लिए भाटक आवास योजनाओं के साथ बैंकों के वित्तपोषण, निम्न और निम्न मध्य आय के आवास, गंदी-बस्तियों, औद्योगिक कामगारों के आवास, कामकाजी महिलाओं के होस्टल और वयोवृद्धों के लिए आवास तथा जवाहरलाल नेहरू  राष्ट्रीय शहरी नवीनीकरण मिशन के अधीन वित्तपोषित आवासीय परियोजनाओं के साथ पुनर्वित्तपोषित करना चाहता है ।

प्रमुख विशेषताएं

1.    उद्देश्य

रिहायशी आवास के लिए भवन निर्माण वित्तपोषण के ज़रिए वहनीय घरों की उपलब्धता की सुविधार्थ वित्तपोषण नव भवन निर्माण अर्थात् वर्तमान संपत्तियों के उन्नयन/मरम्मत के अतिरिक्त प्राथमिक आवास से संबंधित अधिरचना और भवन निर्माण के लिए उपलब्ध है ।

निम्नलिखित आवासीय परियोजनाएं पुनर्वित्त सहायता के लिए ग्राह्य हैं :-

क.    आर्थिक रूप से कमज़ोर/निम्न आय वर्ग के लिए रिहायशी आवासीय परियोजनाएं ।
ख.    गंदी-बस्ती पुनर्विकास परियोजनाएं ।
ग.    महानगरों एवं अन्य नगरों में प्रवासी शमिकों के लिए भाटक आवासीय परियोजनाएं ।
घ.     प्राथमिक ऋणदाता संस्थानों द्वारा प्रदत्त सामुदायिक थोक ऋण (नगरपालिका प्राधिकारियों द्वारा सुनिश्चित किराएदारी अधिकारों के साथ) अर्थात्  प्राथमिक ऋणदाता संस्थान सामुदायिक आधारित वित्तीय संस्थानों द्वारा प्रारम्भ की गई आवासीय परियोजनाओं को भी वित्तपोषित कर सकते हैं ।
ङ     आवासीय बुनियादी ढांचे को मज़बूत बनाने और उसके आधुनिकीकरण के साथ वर्तमान आवासीय इकाइयों का उन्नयन/परिवर्धन ।
वित्तपोषित किया जाने वाला आवासीय इकाई का कारपेट क्षेत्र अधिकतम 700 वर्गफीट तक होना चाहिए ।

2.    ग्राह्य प्राथमिक ऋणदाता संस्थान

अनुसूचित बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, आवास वित्त कंपनियां, व्यष्टि वित्त संस्थान और अन्य ग्राह्य संस्थान जिन्हें सरकार अधिसूचित करे ।

3.    संस्वीकृति पैरामीटर

  1. दीर्घावधि ऋण - नवीनतम वार्षिक संपरीक्षित लेखा के अनुसार, विकासक का सामान्य शेयर (इक्विटी) अनुपात 2:1 से अधिक नहीं होना चाहिए ।
  2. विकासक से मार्जिन - परियोजना परिव्यय का न्यूनतम 20% ।
  3. प्राथमिक ऋणदाता संस्थान को प्रदत्त प्रतिभूति - संपत्ति का बंधक होगी और अन्य प्रतिभूति, जो प्राथमिक ऋणदाता संस्थान यथा समर्थक प्राप्त करे ।
  4. अस्थायी आस्ति अनुपात - तृतीय स्वतंत्र पक्षकार के मूल्यांकन के  ज़रिए निकाली गई बाज़ार की कीमत पर आधारित, न्यूनतम आस्तियां 1.33:1 होनी चाहिएं ।

4.    ग्राह्य क्षेत्र

महानगरों अर्थात् मुम्बई, दिल्ली, कोलकाता, चैन्नई, बैंगलुरु  एवं हैदराबाद सहित ग्रामीण एवं शहरी केन्द्र । ध्यान, टियर-II एवं टियर-III नगरों और महानगरों में गंदी-बस्ती पुनर्विकास की परियोजनाओं पर संकेन्द्रित होगा ।

5.    ग्राह्य अंतिम उपयोगकर्तागण

लोक आवास अभिकरण, आवास में निजी विकासक, सार्वजनिक निजी भागीदारी, सहकारी समितियां और सैनिक कल्याण आवास संगठन, केन्द्र सरकार कर्मचारी कल्याण आवास संगठन, भारतीय रेल कल्याण संगठन और वायुसेना नैवल आवास बोर्ड जैसे कर्मचारी आवास संगठन ।

6.    ग्राह्य राशि

अतिरिक्त रूप से परियोजना की वित्तपोषित की जाने वाली प्रत्येक आवासीय इकाई का विक्रय मूल्य 10% के अधिकतम निर्मित मूल्य बढ़ोतरी के साथ 15 लाख रुपए से अधिक नहीं होगा ।

7.    पुनर्वित्त की राशि

वहनीय आवास के लिए ग्राह्य प्राथमिक ऋणदाता संस्थान द्वारा संस्वीकृत ऋण की राशि 100% ।

8.    पुनर्वित्त की अवधि

अधिकतम  5 वर्षों के अध्यधीन, विकासक/भवन निर्माता को प्राथमिक ऋणदाता संस्थान के ऋण के साथ-साथ समाप्त होने वाली ।

9.    पुनर्भुगतान

एक वर्ष की प्रारम्भिक अधिस्थगन अवधि के साथ, विशिष्ट रूप से किस्तों में परियोजना के आकार पर निर्भर करते हुए मामले-दर-मामले के आधार पर नियत किया जाएगा । आपवादिक मामलों में पुनर्वित्त के एकमुश्त पुनर्भुगतान की अनुज्ञा दी जा सकती है ।

10.   ब्याज की दर

प्राथमिक उधार की दर अथवा बाज़ार के मानदंड से जुड़ी स्थिर/अस्थिर प्राथमिक उधार की दर अथवा बाज़ार के मानदंड से जुड़ी स्थिर/अस्थिर/प्राथमिक ऋणदाता संस्थानों के पास ब्याज की अस्थिर दर अथवा स्थिर दर चुनने का विकल्प है । स्थिर दर से अस्थिर दर अथवा विलोमत: संपरिवर्तन की अनुज्ञा संपरिवर्तन शुल्क के भुगतान पर दी जाती है । सामान्य रूप से उप-प्राथमिक उधार दर के ऋण सार्वजनिक अभिकरणों/समुदाय आधारित संगठनों के लाभार्थ नहीं दिए जाएंगे ।

11.   संवितरण

पुनर्वित्त का संवितरण पुनर्वित्त जारी करने के लिए अनुरोध के अनुसार किया जाएगा । पुनर्वित्त भिन्न-भिन्न समय के आधार पर जारी किया जाएगा जो कि पूर्वतम चरणों के पूरा होने के अध्यधीन होगा (प्रमाणित किया जाएगा) । एक वर्ष के प्रारम्भिक अधिस्थगन  के साथ विशिष्ट रूप से किस्तों में, परियोजना के आकार पर निर्भर करते हुए, अंतिम उधारकर्ता के लिए प्राथमिक ऋणदाता संस्थान द्वारा अनुबद्ध पुनर्भुगतान की अवधि के सामान्यतया अनुरूप मामला-दर-मामला के आधार पर नियत किया जाएगा । एकमुश्त पुनर्भुगतान की अनुज्ञा आपवादिक मामले में दी जाएगी ।

12.   पूर्वभुगतान

पूर्वभुगतान पर विचार प्रचलित नीति के अनुसार किया जाएगा ।

13.   अन्य शर्तें

  1. प्रश्नगत सीमा के अधीन वित्तीय सहायता का लाभ उठाने वाले अपने संघटकों से समय-समय पर बैंक द्वारा प्राप्त/प्राप्त  की जाने वाली  सारी  प्रतिभूति  राष्ट्रीय आवास बैंक  के लिए  और  उसकी ओर से रखी जाएगी और कथित संघटकों से कथित सीमा के अधीन, कोई उगाही अथवा वसूली राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम, 1987   (1987 का 53) की धारा 16बी के अधीन यथा अपेक्षित लागू की जाएगी ।
  2. सभी सांविधिक संस्वीकृतियां/अनुमोदन, संवितरण से पूर्व, आवास ऋणों के संबंध में प्राथमिक ऋणदाता संस्थान द्वारा प्राप्त की जाएंगी ।
  3. अनुसूचित बैंकों और आवास वित्त कंपनियों के लिए यथा लागू समय-समय पर यथा संशोधित पुनर्वित्त योजना के अनुसार अन्य सभी नियम ।
  4. पुनर्वित्त की मंज़ूरी से पहले, उधारकर्ता (विकासक, सोसायटी, इत्यादि) के पास प्रस्तावित परियोजना के लिए भूमि का स्वामित्व होना चाहिए अर्थात् भूमि अधिग्रहण के लिए पुनर्वित्त प्रदान नहीं किया जाएगा ।
  5. परियोजना वित्तीय रूप से अर्थक्षम होनी चाहिए और अधिशेष के साथ पूर्ण लागत वसूली पैदा करने के लिए तैयार की जानी चाहिए ।
  6. ऋण, परियोजना की वास्तविक प्रगति के अनुसार यथा अनुपात आधार पर जारी किया जाएगा ।
  7. इस प्रकार से प्रदत्त पुनर्वित्त प्राथमिक ऋणदाता संस्थानों को राष्ट्रीय आवास बैंक के निवेश का भाग होगा और वैयक्तिक आवास ऋणों के संस्वीकृत निवेश सीमा से अतिरिक्त नहीं होगा ।
 
 
   
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